क्या हम मंगल ग्रह पर कोलोनी बना सकते हैं? Can We Terraform Mars in hindi?

 क्या हम मंगल ग्रह पर कोलोनी बना पाएगे?


मंगल पर बस्ती बनाना मतलब कागज की नाव को पानी में उतार ने जैसा हे. पर इसका मतलब ये नहीं की हमें कोसिस नहीं करना चाहिए. सन 1890 Guglielmo marconi ने रेडिओ वेव की खोज की तब किसे पटता भविष्य में इस की हेल्प से इन्टरनेट चलने वाला हे, लेकिन वो हुवा और आज आप मेरे विदीओ देख रहे हो. 

Illustration of terraforming Mars
Terraform Mars

लेकिन किसी भी चीज के सारे पहेलु जाने बिना गलत कहे देना भी तो गलत हे. इसी लिए पहेले जानते हे की वास्तव में टेराफॉर्मिंग क्या है? और हमारा पड़ोसी मंगल, इस टेराफॉर्मिंग गतिविधि को आज़माने के लिए बेहतरीन जगह हे अगर हा तो  क्यों ?  


टेराफॉर्मिंग क्या है? What is terraforming?

सीधे शब्दों में कहें तो, किसी ग्रह के वातावरण और अन्य पर्यावरणीय विशेषताओं में हेरफेर करना ताकि उस ग्रह की जलवायु जीवन के लिए रहने योग्य हो जाए. सबसे अच्छा विकल्प उस ग्रहों की जलवायु को बदलना होगा, ताकि मनुष्य बिना स्पेससूट के भी वहां रह सकें.

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टेराफॉर्मिंग के लिए मंगल एक अच्छा विकल्प क्यों है? Why is Mars a good choice for terraforming?

सबसे पहेला सवाल भाई हमारे सौर मंडल के आठ ग्रहों मेसे terraforming केलिए मंगल ही क्यों? ठीक हे, हम गिनती करते हे, सूरज के सबसे नजदीक वाले दो ग्रह  बुध और शुक्र ये दोनों एक अंतरिक्ष यान के जीवित रहने के लिए बहुत गर्म हैं, मनुष्यों की तो बात ही छोड़िए.  जोवियन ग्रह-बृहस्पति से नेपच्यून तक- गैस ग्रह हैं, उनके पास हमारे पैर रखने के लिए ठोस जमीन भी नहीं है! तो जाहिर है, मंगल ही एकलोता विकल्प प्रतीत होता है.


टेराफॉर्मिंग मंगल से जुड़ी चुनौतियाँ.

हालांकि, हलाकि आसान तो मंगल भी नहीं हे, मंगल ग्रह भी चुनौतियों से भरा हुआ है। मंगल का वायुमंडल बहुत पतला है और औसतन तापमान -60 degrees Celsius है। इसके अलावा, मंगल ग्रह पर एटमोस्फियरिक प्रेशर पृथ्वी के एटमोस्फियरिक प्रेशर के मुकाबले  1% भी नहीं है. पृथ्वी के समुद्र स्तर से एटमोस्फियरिक प्रेशर  14.7 psi हे और  इस की तुलना में पर मंगल ग्रह के एटमोस्फियरिक में प्रेशर 0.095 psi है. जोकि बहोत कम हे हमारा शरीस इतने कम प्रेसर पर रहेने केलिए नहीं बना हे. लेकिन सबसे पहेली चुनोती हे ग्रह को गरम करना. हमें पहले इन दोनों चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है, और उसके बाद ही हम अन्य चिंताओं के बारे में सोच सकते हैं, जैसे कि भोजन कैसे विकसित किया जाए या मंगल ग्रह के किसी भी निवासी को cosmic radiation से कैसे बचाया जाए.


मंगल हमेशा दुर्गम नहीं था.

दरसल मंगल ग्रह हमेशा ऐसा नहीं था. कई विद्वानों का मानना हे किसी वक्त मंगल ग्रह पर भी एक वातावरण हुवा करता था और तरल पानी भी मोजूद था. जीने केलिए हवा के साथ साथ पानी का भी बहुत महत्त्व हे. इसी लिए किसी भी ग्रह पर जीवन को विकसित करने केलिए इस की आवश्यकता तो होगी ही. पर अफसोस की बात है कि पिछले कुछ अरबो सालो पहेले मंगल का घना वातावरण बाहरी अंतरिक्ष में फट गया था, इसलिए जो भी पानी मौजूद था वह जम गया या वाष्पित हो गया, जिससे ग्रह जीवन के लिए अयोग्य हो गया. 

ग्रह पर जीवन को पनप ने केलिए, हम सांस ले सकें ऐसे वातावरण की जरुरत है. पृथ्वी के वायुमंडल में 21% ऑक्सीजन, 78% नाइट्रोजन और 1% अन्य गैसें तत्व हैं। हलाकि हमें इस मिश्रण की जरुरत नहीं है. लेकिन ओक्सिजन इसकी आवस्यकता तो रहेगी ही, ना की सिर्फ हमारे सास लेने केलिये बल्कि रोड पर चल रही एक बाइक से लेके हवामे उड़ रहे एरोप्लेन तक को चलने केलिए ऑक्सीजन जरुरी है. ये केना गलत नहीं होगा की प्रथ्वी पर मोजूद ज्यादातर इंजन बिना ऑक्सीजन के कम करना बंद कर देगे. 

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तो चलो देखे मंगल को रहने योग्य केसे बनाए. (Making Mars habitable)



विशाल कक्षीय दर्पण. (Giant orbital mirrors)

मंगल के वातावरण को ऑक्सीजन की पर्याप्त सांद्रता से भरने के बाद , हमें इसे गर्म करने की भी आवश्यकता होगी. जैसा कि हमने पहले बताया था किया-60 degrees Celsius के औसत तापमान के साथ साथ, इस ठंडे और लाल ग्रह पर जीवित रहने के लिए यह बहुत कठिन है. सन 1993 में नासा के लिए काम करने वाले शोधकर्ताओं ने मंगल ग्रह को गर्म करने का एक तरीका प्रस्तावित किया. उन्होंने सतह पर सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करने के लिए विशाल कक्षीय दर्पण बनाने का सुझाव दिया. यह विचार था कि मंगल के ऊपर और उसके चारों ओर  strategically placing से विशाल orbital mirrors लगाकर सूर्य के प्रकाश को रेदिरेक्ट किया जाए.ये ठीक उसी तरह जेसे Archimedes के सूरज के प्रकाश की गर्मी से दुसमन जहाज नष्ट करने के लिए जाने जाने वाले large mirrors. और साथ में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस रणनीति का उपयोग करके, ग्रह पर जमे हुए पानी (बर्फ) को भी पिघलाया जाएगा, जो हमें पानी प्रदान करेगा - क्यों की किसी विदेसी ग्रह पर जीने केलिए एक और जरुरी तत्व पानी है.

ग्रीन हाउस गैसें. Greenhouse gases

इस के अलावा एक और तरीका है  ग्रह को गर्म करने का "ग्रीनहाउस गैसों". जी हां, वो कुख्यात गैसें जिसने हमारे ग्रह की बैंड बजाई हुई है. (जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बना हुवा है.) आप देख सकते हैं, "वार्मिंग" यहाँ एक कीवर्ड है. ग्रीनहाउस गैसें, अपनी प्रकृति के कारण, वातावरण में गर्मी को फंसाने और तापमान को बढ़ाने में महान हैं। और मंगल ग्रह पर, ठीक यही हम चाहते हैं। दूसरे शब्दों में कहे, पृथ्वी पर हमारा खलनायक मंगल ग्रह पर हमारा नायक हो सकता है! विद्वानों का सुझाव है ग्रीनहाउस गैसें मंगल ग्रह के वातावरण को मोटा करेंगी, सतह के तापमान को बढ़ाएँगी और ग्रह को cosmic radiation से भी बचाएँगी।

CO2 हमारे ग्रह पर सबसे आम ग्रीनहाउस गैस है, तो एक सवाल यह होता है कि क्या मंगल ग्रह पर वातावरण को मोटा करने के लिए पर्याप्त CO2 है?

Nuking the poles

मंगल के ध्रुवों में, पृथ्वी की तरह, बर्फ का एक मोटा भूभाग है. स्पेसएक्स के संस्थापक एलोन मस्क सहित कई विशेषज्ञ मानते हैं कि मंगल के ध्रुवों को नोचने से CO2 की एक अच्छी मात्रा निकल जाएगी जो वर्तमान में वायुमंडल में फंस गई है.

मंगल ग्रह की मिट्टी. (Martian soil)

सीओ 2 निकालने का एक और अच्छा स्रोत मंगल ग्रह की मिट्टी होगी, कार्बन से भरपूर मंगल ग्रह की मिट्टी, पर मुश्केली ये है की उसे अनलॉक करना मुश्किल है. दरसल इनकी मिट्टी से कार्बन डाइऑक्साइड छुडवाने केलिए इसे हज़ार डिग्री तक गर्म करने की आवश्यकता होगी.

मंगल की सतह का क्षेत्रफल लगभग 144 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, इसलिए हमें लाल ग्रह को पूरी तरह से ढकने के लिए अरबों टन गैस की आवश्यकता होगी. ऐसा करने के लिए आवश्यक ऊर्जा लगभग अकल्पनीय होगी. इसका मतलब होगा मंगल ग्रह पर कई दशकों तक विशाल nuclear power plants का निर्माण और संचालन करना ताकि मंगल ग्रह की सतह के तापमान को गर्म करने के लिए पर्याप्त ग्रीनहाउस गैसों से भर सके.

Aerogel 

एक और तत्व जो मंगल ग्रह पर गर्मी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, वह है एरोजेल. Aerogel मनुष्यों के द्वार पाई गए सबसे हल्की सामग्री में से एक है। Aerogel पृथ्वी का सबसे हल्का मटेरियल होनेके साथ साथ काफी सॉलिड भी है, वास्तव में ये 99% हवा से बना है! और यह एक अच्छा इन्सुलेटर भी है, और यही वजह है कि नासा के मौजूदा मार्स रोवर्स मिशन में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

हार्वर्ड के शोधकर्ता रॉबिन वर्ड्सवर्थ ने हाल ही में प्रकाशित एक पेपर में प्रदर्शित किया कि मंगल ग्रह पर Aerogel का उपयोग कैसे किया जा सकता है। वर्ड्सवर्थ ने Aerogel पर पड़ने वाले मंगल ग्रह के सूर्य के प्रकाश की नकल करने के लिए एक दीपक जलाया। ऐसा करने से, वह एयरजेल के नीचे की सतह को 65 degrees Celsius तक गर्म रखने में सक्षम था. उनका तर्क है कि लाल ग्रह पर इस प्रकार का Aerogel कवर मंगल के वातावरण में गर्मी को फंसाने में मदद करेगा.

दुर्भाग्य से, aerogel सही नहीं है। यह काफी brittle होता है, और पर्याप्त मात्रा में इसका उत्पादन करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.

धूमकेतु. (Comets)

हां, ये एक और तरीका हो सकता है मंगल को terraform करने का, धूमकेतु नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का एक बहुत बड़ा स्रोत हैं - पृथ्वी जैसा वातावरण बनाने के लिए आवश्यक प्राथमिक घटक, अगर हम धूमकेतुओं को किसी तरह मंगल ग्रह के सरफेस पर रीडायरेक्ट कर के क्रेश करवा सके, तो मंगल ग्रह के वातावरण में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की एक अच्छी मात्रा बड़ा सकते है.

फिर भी, कुछ विद्वानों ऐसा करने के खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं. वे विरोध करते हैं कि मंगल पर धूमकेतुओं की बमबारी विनाश हो सकती है. ऐसा करने से जीवन के उन सभी सबूतों का सफाया हो जाएगा जिनकी खोज हमने अभीतक नहीं की.( जिन्हें हमने अभीतक नहीं खोजे हैं ) (और सायद हम जीवन के उन प्राचीन इतिहास को भी खोदे जो हमे मंगल से मिल सकता हो.)


हम मंगल ग्रह पर कालोनी बना ने के कितने करीब हैं? How close are we to terraforming Mars?

मंगल ग्रह पर कालोनी बना ने का सबसे पहला कदम मंगल पर पहले मानव को उतारना होगा, ठीक उसी तरह जैसे हम एक बार चंद्रमा पर उतरे थे. एक बार जब हम ग्रह पर पहुंच जाते हैं, तो हमारा अगला कदम उस ग्रह पर पहला वैज्ञानिक चौकी स्थापित करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेशी ग्रह पर कुछ स्तर की स्थिरता है. सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मुट्ठी भर trained अंतरिक्ष यात्रियों से लेकर हजारों अंतरिक्ष उत्साही लोगों की उपस्थिति को बढ़ाना होगा. क्यों की terraforming मिशन को किकस्टार्ट करने के लिए हमें निश्चित रूप से हजारों की संख्या में जनशक्ति की आवश्यकता होगी।

टेराफॉर्मिंग मंगल के प्रभाव. (Ramifications of terraforming Mars)

मंगल पर रहेने वाले Martians, वहा के वातावरण को पीढ़ी दर पीढ़ी adapt करने लगे गे. मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है, इसी लिए वहा के लोग हमसे लम्बे भी हो सकते है. वे नए रक्त रसायन भी विकसित कर सकते हैं, कुल मिलाकर, वे हमसे अलग हो सकते हैं और एक नई प्रजाति बन सकते हैं, क्यों की वहा का एर प्रेसर पृथ्वी के मुकाबले कम रहेता है तो वहा के लोग उस वातावरण के हिसाब से अपनेको ढाल ने लगे गे, अगर वो एसा करने में कामयाब रहेतो वो एक नए प्रजाति की तरह उबरके आयेगे.

नैतिक चिंताएं. Ethical concerns

हालांकि यह संभावना नहीं दिखती है कि निकट भविष्य हम में मंगल ग्रह को terraform कर लेगे. फिर भी क्या हमें वास्तव में किसी ग्रह के प्राकृतिक पर्यावरण के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए? क्या हमें वाकई में किसी अन्य ग्रह पर इंसानी कालोनिय बनानी कहिये? ये कुछ नैतिक प्रश्न हैं जिनका एक ठोस उत्तर की आवश्यकता होगी।

वैसे मंगल ग्रह को अपनी सुविधा के मुताबिक ढलने की बजाये पृथ्वी के पर्यावरण को स्वच्छ और जीवन के अनुकूल रखना बहुत आसान होगा. आज जिस तरह हम अपने वातावरण की बेंड बजाने में लगे है कुछ सालोमे हमारे ग्रह की भी हालत मंगल ग्रह जैसी ना हो जाए.

अंतमे बस इतना ही कहुगा की निकट भविष्य में नहीं नहीं यहा तक की हमरे जीवन काल में भी ऐसी कोई संभावना नहीं दिख रही की मानव सभ्यता को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर कोलोनिज़ बनाते देख सके. हलाकि हमारे वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करने की खोज में हैं जो इस मुकाम तक लेजा सके. बाकि तो समय ही बताएगा कि इस विशाल ब्रह्मांड में पृथ्वी से परे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में मानवता कितनी सफल होगी!





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