आखिर बिजली zig zag क्यों दिखती हे? why lightning always zigzag?

why lightning always zig-zag?


आसमान में कडकती हुई बिजली को देखना काफी रोमांचक होता हे. युतो बारिस के मोसम में हम अक्सर बिजली को कड़कते देखते हे, लेकिन कई बार ये बिजली धरती से भी टकरा जाती हे, जीन्होंने हमारा बिजली केसे गिरती हे वाला पोस्ट पढ़ा होगा उनको पता होगा की आखिर बिजली जमीन पर क्यों गिरती हे. अगर नही देखा तो कोई बात नहीं में वो भी आप को समजा दुगा. पर अभी हमारा सवाल ये नहीं हे की बिजली केसे गिरती हे, बल्की ये हे की वो गिरते समय हमेसा zig-zag पेटर्न में ही क्यों होता हे.

वेसे वेसे बिजली मूल रूप से एक विद्युत प्रवाह हे, वेसी ही जेसी हमारे ग्रोमे होती हे. पर ये बिजली इससे कई गुना अधिक सकतीसाली और खतरनाख होती हे. आसमानी बिजली का तापमान २७००० डिग्री सेल्सियस तक भी होता हे. सूरज की सतह से कई गुना अधिक. 

जेसा की हम जानते हे जायदातर वक्त बिजली बदलो के बिच में ही कड़कती हे, पर कई बार ये बिजली धरती पर गिर जाती हे. जिस से हमें एक बिजली की लाइन दिखाई देती हे.


बदलो के ऊपर के बहग में बहोत ही कम तामपान होता हे. जिस वजह से water vapor बर्फ के छोटे छोटे टुकडो में बदल जाते है. और जैसे-जैसे बादल बड़ा होता जाता है, बर्फ के ये छोटे-छोटे टुकड़े आपस में टकराने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप विद्युत आवेश (electric charge) बनने लगता हे. हल्के और positively-charged particles बादल में ऊपर रहते हैं, जबकि भारी  और negatively-charged particles (इलेक्ट्रॉन) बादल के निचले भाग में रहते हैं. बदलो में बिजली तब ही दिखाई देती हे जब electrical charge enough opposite-charged के साथ एक चैनल बनाने के लिए. मतलब बदलो में रहा negatively-charged particles बदलो के या धरती के किसी positively-charged particles से कनेक्शन बना लेता हे तो बिजली दिखाई देती हे. 

अब हमारा मुख्य सवाल आखिर बिजली zig zag  क्यों दिखती हे? / Why Such a Weird Shape? तो ये ठीक वेसे ही जैसे हम मनुष्य करते हैं, बिजली कम से कम अवरोध वाले मार्ग पर से जानेका पसंद करती है, अर्थात, वह मार्ग जहाँ उसके प्रवाह का न्यूनतम विरोध होगा.

इसे समझने के लिए, कल्पना कीजिए कि आपके किसी रेत के ढेर पर खड़े हे, अब जब आप उस पर पानी डालते हैं, ठीक ढेर शिखर पर, तब आप देखना पानी नीचे की ओर कैसे बहता है? क्या यह हमेशा एक सीधी रेखा में बहती है? क्या कोई विशिष्ट पैटर्न है जिसका वह पालन करता है?

नहीं, बिलकुल नहीं. पानी नीचे आने के लिए कोई विशिष्ट पैटर्न का पालन नहीं करता. ठीक वेसे ही बिजली गिरने के मामले में भी है।

हवा कई चीजों से बनी है, गैसें, धूल कण, प्रदूषक और अन्य पदार्थ. हालांकि, यह मिश्रण सभी जगह एक समान नहीं है। हवा असमान और अनियमित है, यही कारण है कि जब बिजली बनती है तब उसी मार्ग को चुनती हे जहा उसे कम से कम अवरोध हो. इसी लिए आप कभी भी बिजली का एक सीधा बोल्ट नहीं देखेंगे होगे, कम से कम वास्तविक दुनिया में तो नहीं.

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