टेक्टोनिक प्लेट क्यों सरकती रहती है? Why tectonic plate move in hindi? Tectonic plates in hindi.

 आख़िर टेक्टोनिक प्लेट क्यों सरकती रहती है? Why tectonic plate move in hindi? 

 
 टेक्टोनिक प्लेट ( tectonic plate in hindi ) के बारे में, आप सब जानते ही होगे जिस पर आप और हम रहते हैं। जिससे सारे कॉन्टिनेंट बने हैं। कोई वक्त था जब यह सारे देश, सारे कॉन्टिनेंट एक दूसरे से जुड़े हुए थे। जिसे आल्फ्रेड वेगनर द्वारा नाम दिया गया पेनजिया।(Pangaea supercontinent in hindi) और इसके साथ चारों और एक महासागर था जिसका नाम दिया गया था पेठालासा। आज हम जानते हैं कि यह टेक्टोनिक प्लेट खिसकती है। जिसके कारण भूकंप और ज्वालामुखी जैसी आपत्तियां आती हैं। पर क्या आप जानते हो कि वो प्लेट्स क्यु खिसकती है। ऐसा तो क्या होता है, जिससे ये प्लेट खिसकने लगती हैं। तो आइए जानते है कि आखिर ये टैकटोनिक प्लेट क्यों खिसकती है।

आपने कभी भूगोल पड़ा होगा तो कभी ना कभी आल्फ्रेड वेगनर के बारे में तो सुना ही होगा। जिन्होंने टेक्टोनिक प्लेट के खिसकने पर थिअरी दी है। तो आज हम उन्हीं के सिद्धांतों पर से समझने वाले हैं कि आखिर टेक्टोनिक प्लेट क्योंकि खिसकती हैं। आज हम जानते हैं कि पृथ्वी के निर्माण के वक्त यह सारे प्लेट एक दूसरे से जुड़ी हुई थी। जिसका नाम दिया गया था "पेनजिया" और फिर उन प्लेटो के सरकने के वजह से पेजिया सुपरकॉन्टीनेस के दो भाग हुए। जिसके ऊपर के हिस्से को लारेसिया और दक्षिण के हिस्से को गोडवाला लैंड कहा जाने लगा। और इन दोनों के डिवाइड होने से एक महासागर का निर्माण हुआ और जिसका नाम दिया गया टेथिस सागर। पेजिया मैं से अलग हुए उत्तरी महाद्वीप में से आज के एशिया, यूरोप और उत्तर अमेरिका जैसे खंडों का निर्माण हुआ। और दक्षिणी महाद्वीप में से दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे खंड का निर्माण हुआ।


हमारा देश भारत भले ही भौगोलिक रिते एशिया का भाग हो, लेकिन वास्तव में उस वक्त भारत एक दक्षिणी महाद्वीप मतलब के गोंडवाना लैंड का ही भाग था। और आज का अफ्रिका और भारत एक ही प्लेट पर टिके थे फिर धीरे धीरे अंदरूनी प्लेट के सरकने से प्लैटे भी अलग-अलग होती गई। और भारत की ज्योग्राफिकल प्लेट अफ्रीका से अलग होकर धीरे-धीरे एशिया की और बढ़ने लगी। वह आज के लद्दाख के हिस्से में लगातार बढ़ती रही और प्लेट का एशिया के लडाक वाले हिस्से पर टकराव हुआ। भूगोल के अनुसार जब दो प्लेट का टकराव होता है, तो भारी प्लेट नीचे की और सरक जाती हैं। और हल्की प्लेट ऊपर की ओर जाती है उस वक्त ऐसा ही हुआ और आज के हिमालय का निर्माण हुआ। और आज भी भारत की यह प्लेट हिमालय की और दब रही है और हिमालय इसके कारण दिनभर ऊपर उठ रहता है। इसके कारण माउंट एवरेस्ट और हिमालय के पर्वत की ऊंचाई साल भर बढ़ रहे ती है।

तो अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि, आखिर यह प्लेट क्योंकि सकती हैं। आज हम जानते हैं कि, जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब पृथ्वी एक आग का गोला थी। फिर धीरे धीरे उसमें कूलिंग प्रोसेस होने लगी और वह ठंडी होने लगी। जिससे फिर निर्माण हुआ स्थल मंडल का। ये ठीक उसी तरह हुआ जिस तरह गर्म चाय के कप में ऊपर से ठंडक और नीचे से गर्मी पड़ने के कारण ऊपर मलाई जम जाती है। बिल्कुल इसी तरह पृथ्वी का उपरी वातावरण ठंडा होने लगा जिससे से उसे ऊपर से ठंडक मिलने लगी और नीचे से गर्मी।

इसी कारण ही पृथ्वी पर ठोस पदार्थ का निर्माण हुआ और फिर सालों बीत गए। और हिमवर्षा का दौर आया। जो आज हम जानते हैं कि पृथ्वी पर एक डोर था जब पूरी पृथ्वी बर्फ से ढकी हुई थी। उस दौर के दौरान अस्थल खंड पर इस कदर प्रेस बनने लगा। कि ऊपर से जमा देने वाली ठंड और नीचे से बेहत गर्मी। जिसके दबाव के कारण ऊपरी प्लेट में क्रैक आने लगे। और वह दो अलग-अलग टुकड़ों में विभाजित हो गए। उत्तरी भाग और दक्षिणी भाग उत्तरी भागों को लारेन्सिया और दक्षिणी भाग को गोंडवाना लैंड नाम दिया गया। गोंडवाना लैंड जिनमें हमारा भारत था। लेकिन ऐसा तो क्या हुआ जिससे हमारा भारत अफ्रीका से अलग होकर एशिया की ओर बढ़ने लगा। नीचे कोई इंजन तो लगा नहीं है जो उसे उड़ाके यहां तक ले आएगा। इसके पीछे कोई ना कोई तर्क तो जरूर होगा। 

तो इसका कारण यह बताया जाता है, कि पृथ्वी का अंदर का भाग आज भी गरम है। और इस गर्मी के कारण अंदर से जो ऊर्जा उत्पादन हो रही है, वो प्रेशर जो पृथ्वी के स्थलमंडल के ऊपर लग रहा है। ये कुछ इस तरह लगता है कि जैसे हम कोई सूप उबालते हैं। तब नीचे से गर्मी के कारण सूप गोल गोल घूमने लगता है। ठीक वैसे ही पृथ्वी के अंदर भी ऐसा ही दबाव लग रहा है और यह दबाव तीन प्रकार से लगता है।

 
transform प्रेसर, convergent प्रेसर and divergent प्रेशर। इन प्रेशर के कारण सारे कॉन्टिनेंट अलग अलग होने लगे। और आज भी एक दूसरे से अलग होते जा रहे हैं। जैसे कि हमारा भारत अफ्रीका से अलग होके, एशिया में आया और उसके टकराव के कारण हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ। और आज भी भारत धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसक रहा है। भारत जिस तरह से गति कर रहा है, उसे कहते convergent गति इस से दो प्लेट एक दूसरे से टकराती हैं। और पर्वत का निर्माण करती है। हालांकि यह सब होने में बहुत ज्यादा समय लगता है, पर यही सच्चाई है। भूकंप और ज्वालामुखी जैसी आपपत्तियों का कारण भी यही प्लेट ही है। और दूसरी तरफ देखे तो कई प्लेट एसी भी है, जो divergent गति कर रही हैं। जिससे दो प्लेट एक दूसरे से अलग होती है, और इनके कारण ज्वालामुखी उत्पन्न होती है। और अंदर का मैग्मा बाहर आकर नई प्लेट की रचना करता है। ज्वालामुखी की बात हम किसी और वीडियो में करेंगे। अभी इसकी तीसरी गति के बारे में जान लेते हैं। transform गति इस गति में दोनों प्लेट एक दूसरे के पास गीसत्कि हुई जाती है। जिस मे ज्वालामुखी का खतरा तो कम होता है। पर भूकंप जरूर आता है। जैसे कि हम जापान को देख सकते हैं वो transform कती कर रहा है इसी कारण वहां पर अक्सर भूकंप आते रहता है। हालांकि यह सब होने में बहुत ज्यादा समय लगता है, पर यही सच्चाई है। भूकंप और ज्वालामुखी जैसी आपत्तियों का कारण भी यही प्लेट है। 

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