अंतरिक्ष में कोई भी यान एस्टेरॉइड से क्यों नहीं टकराता? Why does no spacecraft hit an asteroid?

अंतरिक्ष में कोई भी यान एस्टेरॉइड से क्यों नहीं टकराता?

अंतरिक्ष प्रारंभ से ही मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करता आरहा है। शुरुआत में मनुष्य अपनी कल्पना से अंतरिक्ष का शेयर किया करता था। और आज उसी कल्पना को साकार करने के लिए अंतरिक्ष में कहीं दूर जा चुका है। Voyager 1 इंसान के द्वारा सबसे दूर भेजा गया स्पेसक्राफ्ट है। और आज वो हमसे 152 AU (astronomical unit) मतलब की 22,74,40,66,932 km से भी ज्यादा दूरी तय कर चुका है। वह 1 second में 17 km की दूरी तय करता है। मतलब की 1 घंटे में 61,200 km की दूरी तय कर लेता है। इतनी रफ्तार में उसे पृथ्वी से चांद तक पहुंचने में मात्र साढ़े छे घंटे (6 घंटे और 28 मिनट) का ही वक्त लगेगा। यह स्पीड बहुत ज्यादा होती है, इतनी स्पीड में अगर कोई छोटी सी चीज भी यान से टकरा जाए तो वो पूरे यान को तहस-नहस कर ने के लिए काफी हो सकती है। ऐसे में आपने कभी न कभी सोचा ही होगा कि कैसे यह अंतरिक्ष यान बिना टकराए अंतरिक्ष में ट्रैवल कर पाते हैं। स्पेशली मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद asteroid belt और नॅप्ट्यून के पार मौजूद Kuiper belt को पार कर लेते हैं। 

दोस्तों इस सवाल का जवाब जानने से पहले आपको हमारे सूर्य मंडल की कुछ बातें पता होनी चाहिए। हमारे सौरमंडल में मुख्य रूप से मेजर स्पेस ऑब्जेक्ट डिस्क मौजूद है। इसमें सबसे पहले है, Asteroid belt, kuiper belt, oort cloud. 

Asteroid belt: 


ऐस्टरौएड बॅल्ट हमारे सौर मंडल का एक क्षेत्र है जो मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच स्थित है और जिसमें हज़ारों-लाखों ऐस्टरौएड सूरज की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें एक 950 किमी के व्यास वाला सीरीस नाम का बौना ग्रह (dwarf planet) भी है जो अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षक खिचाव से गोल अकार पा चुका है। यहाँ तीन और 400 किमी के व्यास से बड़े एस्ट्रॉयड पाए जा चुके हैं, वॅस्टा, पैलस और हाइजिआ। पूरे ऐस्टरौएड बॅल्ट के कुल द्रव्यमान में से आधे से ज़्यादा इन्ही चार वस्तुओं में निहित है। बाक़ी वस्तुओं का अकार भिन्न-भिन्न है - कुछ तो दसियों किलोमीटर बड़े हैं और कुछ धूल के कण मात्र हैं। इतने विशाल क्षेत्र में मौजूद होने के बावजूद भी इस का mass हमारे चंद्रमा के mass के मात्र 4% है।

kuiper belt:

वही kuiper belt सबसे बड़े स्ट्रक्चर में से एक है। Asteroid belt की तरह इसमें भी हज़ारों-लाखों छोटी-बड़ी खगोलीय वस्तुएँ हैं जो सौर मण्डल के ग्रहों के सृजनात्मक दौर से बची हुई रह गयी है। kuiper belt का क्षेत्र Asteroid belt के क्षेत्र से २० गुना चौड़ा और २०० गुना ज़्यादा फैला हुआ है। जहाँ Asteroid belt की वस्तुएँ पत्थर और धातुओं की बनी हुई हैं, वहाँ kuiper belt की वस्तुएँ सर्दी की सख्ती से जमे हुए पानी, मीथेन और अमोनिया की मिली-जुली बर्फ़ों की बनी हुई हैं।


सौर मण्डल के ज्ञात बौने ग्रहों में से तीन  यम, हउमेया और माकेमाके kuiper belt के निवासी हैं। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है के सौर मण्डल के कुछ प्राकृतिक उपग्रह भी इसी घेरे में जन्मे और घुमते-फिरते अपने ग्रहों के निटक पहुँच कर उनके गुरुत्वाकर्षण में फँस कर उनकी परिक्रमा करने लगे, जैसे की वरुण (नॅप्ट्यून) का उपग्रह ट्राइटन और शनि का उपग्रह फ़ीबी। 

oort cloud: 

दोस्तों एवं सबसे आखिर में मौजूद है oort cloud जो की सौर मंडल के सबसे बाहरी क्षेत्र में मौजूद है। अंदाजा है कि यह 2000 astronomical unit से लेकर 200000 astronomical unit तक फैला हुआ है। वर्तमान समय में हमारे वैज्ञानिक इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते क्योंकि न सिर्फ यह हमसे दूर है, बल्कि यह एक बहुत ही विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। जिस वजह से इनके दो ऑब्जेक्ट के बीच की दूरी कई हजार किलोमीटर तक की हो जाती है। हमारे voyager 1 को भी वहा तक पहुंचने में अगले करीब 300 साल तक का समय लग जाय गा। एवम् इसके परे जाने केलिए उस 30,000 साल का समय लग सकता है।

दोस्त उम्मीद है कि आप Asteroid belt, kuiper belt और oort cloud तक अच्छे से समझे होंगे। दोस्तों अब हम वापिस अपने सवाल की तरफ लौटते हैं। की कोई भी यान जब अंतरिक्ष में ट्रेवल करता है तो वह उल्कापिंड और क्षुद्रग्रह से क्यों नहीं टकराता। 

दोस्तों ऊपर हमने जाना कि हमारे सूर्य मंडल में ढेर सारे उल्कापिंड और क्षुद्रग्रह मौजूद है। Specially जब यान को मंगल ग्रह की कक्षा से बाहर भेजा जाता है तब मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद Asteroid belt से टकराने के चानसीस बढ़ जाता है। लेकिन फिर भी अभी तक कोई भी यान के साथ ऐसी घटना क्यों नहीं गटी। जबकि हमारा voyager 1 तो नेप्चून और प्लूटो के बीच मौजूद kuiper belt को भी पार कर चुका है, और वर्तमान समय में New Horizons प्लूटो और kuiper belt का अध्ययन कर रहा है। kuiper belt में Asteroid belt की तुलना से भी ज्यादा क्षुद्रग्रह मौजूद है। फिर भी इन यानो की टक्कर किसी एस्ट्रॉयड या क्षुद्रग्रहो से क्यों नहीं होती।


दोस्तों अगर आपके मन में भी अंतरिक्ष यान के टकराने का सवाल जन्मा है तो अवश्य आपका यह सवाल Asteroid belt और kuiper belt के फोटोस और वीडियोस पर आधारित होगा। जिसमें हमें एक के पीछे एक मौजूद एस्ट्रॉयड को दिखाया जाता है, जोकि सत्य नहीं है। मेरे कहने का तात्पर्य ये है कि, Asteroid belt और kuiper belt मैं एस्ट्रॉयड मौजूद है लेकिन इतने भी पास पास मौजूद नहीं है कि जिससे हमारा यान पास ना हो पाए। यह एस्ट्रॉयड एक दूसरे से सैकड़ों से हजारों किलोमीटर दूर मौजूद होते हैं। जिनके बीच से स्पेसक्राफ्ट आसानी से गुजर जाते हैं। वैज्ञानिक पहले से ही ग्राउंड बेस टेलीस्कोप से उन एस्ट्रॉयड का पता लगा लेते हैं। जिसे हमारी यान की टकराने की संभावना होती है। और हां ऐसा भी नहीं है कि सभी जगह पर एस्ट्रॉयड सैकड़ों से हजारों किलोमीटर दूर हो कई जगह ऐसी भी होती है जहां स्ट्राइड पास पास होते हैं। लेकिन अगर वैज्ञानिकों को कोई भी स्पेसक्राफ्ट इनके बीच से निकलना होता है तो वह ऐसे रास्ते चुनते हैं जहां एस्ट्रॉयड ज्यादा दूरी पर मौजूद होते हैं। जिस वजह से अंतरिक्ष यान में किसी भी एस्ट्रॉयड की टकराने की संभावना बहुत ही कम होती है। 

लेकिन मान लो ऐसी कोई घटना बन जाए कि जिसमें अचानक से कोई एस्ट्रॉयड हमारे यान के सामने आ जाए तो क्या होगा। तो दोस्तों बता दें कि हमारे पास वर्तमान समय में ऐसी टेक्नोलॉजी मौजूद है कि हम कोई भी एस्ट्रॉयड या स्पेस ऑब्जेक्ट का पता हम 72 घंटे पहले से ही लगा सकते हैं। जिससे हमारे पास स्पेसक्राफ्ट का रास्ता बदलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। दोस्तों उम्मीद है कि अब आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा। 

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