क्या हो अगर ग्रेविटी खत्म हो जाए? what would happen if gravity suddenly disappeared in Hindi

क्या हो अगर ग्रेविटी खत्म हो जाए? what would happen if gravity suddenly disappeared?

आसमान में जितने भी तारे ग्रहो उल्कापिंडों जो भी है, उनकी अपनी खुद की ग्रेविटी होती है। और ये ग्रेविटी टोटली डिपेंड करती है उस ऑब्जेक्ट के मेष ऊपर कि वो कितना बड़ा है। ग्रेविटी तब तक रहती है जब तक ये खुद ऑब्जेक्ट रहता है। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता कि ग्रेविटी अचानक से खत्म हो जाए। क्योंकि ग्रेविटी कोई हलवा नहीं है, ऐसे ही खत्म हो जाएगी। Bollywood कि movies को देख के तो ग्रेविटी भी सोच रही होगी कि यार कुछ तो इज्जत कर लेते मेरी। खैर... ग्रेविटी क्या होती है, कैसे हर पदार्थ पर काम करती है और कैसे वो हर पदार्थ को झगड़ते रखती है। पर इसको हम किसी और दिन के लिए रखते हैं। पर आज हम इन मूवीस वालों की लाइन पे आ जाते है। आज ग्रेविटी को खत्म करके ही रहेंगे।😜

आगे बढ़ते हुए... अगर धरती की ग्रेविटी खत्म हो जाए तो हम तैरने नहीं बड़की सीधे धरती से 1600 km की स्पीड में आसमान में फेंक दिए जाएंगे। क्योंकि धरती स्थिर नहीं है। वह खुद अपनी धरी पे 460 meters per second मतलब कि 1600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड में घूम रही है। जिसके कारण दिन और रात होते हैं। ऐसे में अगर ग्रेविटी खत्म हो जाए तो अपनी तो लग गए। हम सीधे आसमान में 1600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड में फुश हो जाएंगे मतलब की फेंक दिया जाएंगे। और वो भी कोई दिशा तय नहीं होगी कि कहां जाकर गिरने वाले हैं। पंछी बनू उड़ता फिरू मस्त गगन में। खैर हम एक लावारिस एस्ट्रॉयड की तरह आसमान में घूमते रहेंगे। ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक कोई तारा या फिर कोई ग्रह हमें अपनी और नहीं बुला ना लेता, मतलब की उनकी ग्रेविटी हमें खींचना लेती। हम पूरे ब्रह्मांड को अपनी आंखों से निहार पाओगे। लेकिन... शर्तिया आपको जिंदा रहना होगा। क्योंकि आसमान में पहुंचते ही आपको सांस लेने के लिए हमें ऑक्सीजन तो घंटा मिलने वाला है नहीं। इसीलिए जिंदा रहने की जिम्मेदारी आपकी वो हम नहीं उठाएंगे। यार हम अकेेले कितनी मेहनत करें, सही कहा ना। क्योंकि झूठ तो मैं बोलता नहुं।

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खैर और अब आगे बढ़ते हुए। चलिए मान लेते हैं की किसी आप तरह धरती पर रह गए, और आपके साथ बहुत सारे लोग भी धरती पर रह गए, तो कितना मजा आ जाएगा नहीं मस्त आराम से उड़ते उड़ते चल पाएंगे। क्योंकि ग्रेविटी तो होगी नहीं सभी का वजन भी जीरो हो जाएगा। हां खाने पीने में थोड़ी दिक्कत आने वाली है। क्योंकि उड़ते हुए खाना पड़ेगा। पर शायद उस की तो प्रैक्टिस हो जाएगी कोई बात ना। क्यों सही है.... ना नहीं है। अगर आप यह सब सोच रहे हो तो आप पूरी तरह गलत हो। चलने का तो छोड़ो 2 फीट दूर खड़े इंसान से बात भी नहीं कर पाओगे। क्योंकि भूल गए नो ग्रेविटी नो कम्युनिकेशन, ग्रेविटी है तो वातावरण है वातावरण है तो हम हैं। मतलब की हमारा पूरा वातावरण सारे गैसेस सब कुछ आसमान में चले जाएंगे। आपके आसपास की जितनी भी बिल्डिंगे है सब धाराशाई होकर आसपास घूमने लगेगी। पूरे वातावरण में धूलकण और बिल्डिंगो की इटे पत्थर हम इंसान के द्वारा फेंका गया कूड़ा भटक रहा रहा होगा। धरती पर जितना भी पानी है वह भी हवा में लटकता हुआ दिखेगा। और हमारा चांद चंदा मामा जो हमारे चारों ओर घूम रहा था वो भी हमें छोड़ कर चला जाएगा। क्योंकि पृथ्वी की ग्रेविटी के कारण ही हमारा चांद हमारे चारों ओर घूमता था। जबकि अब तो ग्रेविटी ही नहीं रही चांद भी अपनी कक्षा को छोड़कर चला जाएगा। अब हमें आसमान में चांद नहीं मिलेगा। और धीरे धीरे अपनी धरती भी अपनी कक्षा को छोड़ने लगेगी। और ग्रेविटी ना होने के कारण धरती छोटे-छोटे टुकड़ों में आसमान में फैल ने लग जाएगी। धरती के अंदर का जो भी लावा है वह भी उछल उछल कर बाहर आने लगेगा।

पर फिर भी वही बात कि आप ये सब देखने के लिए जिंदा ही नहीं हो रहे होंगे। क्योंकि एटमॉस्फेयर तो कब का खत्म हो चुका है। धरती पर ना हीं ऑक्सीजन है ना ही कार्बन डाइऑक्साइड, ना ही पेड़ है, ना ही बिल्डिंग यहां का वातावरण स्पेस जैसा बन गया। यहां तक कि धीरे-धीरे धरती खुद भी नहीं रहेगी।

पर..... हमें डरने की कोई बात नहीं है, क्योंकि ऐसा कभी हो ही नहीं। क्योंकि कभी भी किसी तारे या ग्रह की ग्रेविटी उसके साथ जुड़ी होती है वो कभी ऐसे खत्म हो ही नहीं सकती। पर इस आर्टिकल के माध्यम से आपने ग्रेविटी के महत्व के बारे में जरूर जानने मिला होगा। ग्रेविटी बचाओ ग्रेविटी आपको बचाएगी। हा ठीक है ठीक है ग़लत लिख दिया।

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