Can any animals talk and use language like humans?


क्या कोई भी जानवर इंसानों की तरह भाषा बोल और इस्तेमाल कर पाए गा?

दोस्तो भाषा एक एसी व्यवथा है जिसने आज हम इंसानों को इतना विकसित बना दिया है। बिना भाषा के हम आज के जैसी दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते थे, ऐसे में भाषा के अस्तित्व में आनेका सवाल तो उठ ता है, लेकिन भाषा के आनेका कोई एक फ़ैक्टर जिमेदार नहीं हो सकता। पर हा एक तरह से हम के सकते है कि इंसानों के गले में विकसित हुआ “Vocal Cords” इस का जीमेदार हो सकता है। पर सिर्फ आवाज़ निकाल ना भाषा नहीं बन जाता। खेर भाषा पे किसी ओर दिन जाए गे क्यों कि ये टॉपिक बहुत बड़ा है इस पे एक सेपरेट वीडियो बन सकता है। 


आज हम बात करेंगे क्या Evolution जानवरो को बोलने केलिए सकसम बना सकता है? (Can Evolution make animals capable of speaking?)

हा, बना सकता है।

Mutation के कारण एसा हो सकता है। Mutation शब्द सुनकर पहली चीज आपके दिमाग में आएगी वो है एक्सप्लेन की फिल्में। क्यों कि इनमें Mutations को दिखाया गया है, फिल्मों में हमेशा बड़ा चडा के दिखाया जाता है Mutation को, पर रियलिटी में दोस्तो Mutation ऐसी चीज है जो हर समय होती रहे ती है। बिना म्यूटेशन के Evolution हो ही नहीं सकता। हम लोग आज धरती पर exist नहीं करे गे अगर mutation ना होता। दरअसल Mutation एक मिस्टेक है को genes में आती है genes को कॉपी करते समय। बेसिकली DNA का जो सीक्वेंस है इस सीक्वेंस में change आता है इसे mutation है। और mutation कई कारण से हो सकती है, जिन मेसे मुख्य दो कारण है। पहला कारण है environmentalp कारण जो सूरज से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरण या न्यूक्लियर रेडिएशन जैसी चीजों से हो सकता है, ये आप के सेल्स में mutation कर सकता है। पर ये mutation अच्छी चीज नहीं है, इस से कैंसर जैसी जान लेवा बीमारिया हो सकती है। और दूसरा कारण है Reproduction. जब भी कोई लिविंग organism reproduction करता है तब mutation होती है। DNA कॉपी कर ते टाइम कई बार गलतियां हो जाती है ज्याातर टाइम ये mutation मीनिंग लेस या unuseful होता है।

Hrithik roshan hand



 जैसे कि किसी के हाथ में छे उगलिया होना या तीन हाथ होना। अब इस का कोई फायदा तो दिखता नहीं है। पर ये mutation है।


Mutation in polar bear


कई बार ये mutation काम का भी बन जाता है। जैसे कि इन भालू के केस में हुआ। Mutation के कारण इस भालू के बच्चे का रंग सफेद हो गया। जिस वजह से इस भालू के बच्चे को दूसरे बच्चो के मुकाबले एक advantage हो गया। सफेद बर्फ में भूरे रंग का भालू दूर से दिख जाता है। जिस का इस सफेद भालू को फायदा मिला और यह सफेद भालू अपने अलग gene के साथ फल ने फूलने लगा। धीरे धीरे ये genes अगली पीढ़ी में पहोच ता है कई पीढ़ी बाद उस इलाके में रह रहे ज्यादा तर भालू में ये बदलाव फेल जाता है और भूरे रंग के भालू इस competition में पीछे रह जाते हैं। जेनेटिक बदलाव बार-बार और हरदम होते रहते हैं लेकिन वही बदलाव आगे तक जाते हैं जो जिंदा रहने की उम्मीद बनाते हैं। 


एसा हम इंसानों के साथ भी हुआ है जिसे हम बंदरों में से इंसान बने और गले में आवाज की नली का विकसित हुई। 

जब भी हम बात करते हैं तो, हमारे गले और मुंह में मौजूद कई सारे मांसपेशी इसके लिए काम करती हैं। हमारे श्वसन तंत्र में मौजूद ज़्यादातर अंग हमारे बातों को स्वर में बदल कर भाषा में परिवर्तित करते हैं। इसलिए बोलने ते समय बिना हवा के मदद से हम शब्दों का उच्चारण नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा हमारे स्वर पेटिका में “Vocal Cords” होता है जिसे हम हवा के दवाब के जरिये हिला कर अपने मन मुताबिक शब्दों के तीव्रता में बदलाव ला सकते हैं। परंतु बाकी जानवर ऐसा नहीं कर सकते हैं, वो चाह कर भी अपने Vocal Tract में एक नियमित तथा स्थिर कंपन पैदा नहीं कर सकते, जिस वजह से वो आवाज़ तो निकाल सकते हैं लेकिन बोल नहीं सकते हैं। परंतु अगर जानवरो में इंसानों जैसा Vocal Cords बन जाय हाला की कॉपी तो कॉपी इंसानों जैसा बनना तो मुश्किल है लेकिन इस तरह का Vocal Cords बन जाय जिस से वो अलग अलग तरह के आवाज़ निकाल पाए तो भी काफी दिकते है जो बोलने में बाधा डाल सकती है। पहला तो ये की किसी जानवर के बच्चे में Vocal Cords बन भी जाय तो वो अपनी अगली पीढ़ी में फैला पाएगा या नहीं इसका भी रिस्क बना रहेता है। अगर वो अगली पीढ़ी में फैला भी देता है तो वो mimicry के अलावा कुछ नहीं कर पाएगे। क्यों कि भाषा केलिए अनेक शब्द की जरुरत होती है और शब्द याद कर ने केलिए दिमाग कि जरूरत होती है। जानवरो में दिमाग इतना विकसित नहीं हुआ है कि वो पूरी भाषा याद कर पाए। इस के अलावा अगर आप गौर करेगे तो आपको पता चलेगा की, जानवर के इंसान की तरह जीभ ओर जबड़े लचीले नहीं होते और वो इंसानों की तरह उसका ज्यादा flexibly इस्तमाल भी नहीं कर पाते। जिससे उन्हें शब्द का उच्चारण करने में भी काफी दिक्कत आसक्ति है।

लेकिन इस बात को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता हैं की, जानवरो ओर पेड़ पौधों को एक दूसरे के साथ बात-चीत कर ने केलिए किसी भाषा की जरूरत हैं। यहा पे आप सोचेंगे कि में पेड़ पौधों की बात क्यों कर रहा हूं। दरअसल पोधे भी बोलते है, ये में मजाक नहीं कर रहा। कई वैज्ञानिक का दावा है कि पेड़-पौधे अपने जड़ों (Root) के जरिये एक-दूसरे से बात करते हैं। (Do trees talk?) जी हाँ! कुछ वैज्ञानिक तो ये भी कहते हैं, न बल्कि पेड़-पौधे बल्कि इंसान तथा उनके आसपास मौजूद हर किसी चीज को सुन सकते हैं। इसके साथ ही साथ पौधे कई प्रकार के सिग्नल को भी बातचीत करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।


project florence microsoft

माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा बनाया गया एक डिवाइस “प्रोजेक्ट फ्लोरेन्स” Project Florence. इस डिवाइस को खास तौर पर पेड़-पौधों की बातें करने की ढंग को समझ कर उनसे बात चित करने के लिए बनाया गया हैं। आप इस डिवाइस के जरिये पेड़-पौधों से बात कर सकते हैं। जब भी कोई संदेश आप इस डिवाइस पर टाइप करते हो तो वो लाइट स्पेक्ट्रम के आधार पर प्रकाश के कई तरंगों में बट पौधे के पास पहुंचता हैं। जिससे पौधों को पता चलता हैं की, आप उससे कुछ कहना चाहते हैं। इसके अलावा आप इलेक्ट्रो-केमिकल (Electro-chemical Signal) सिग्नल के आधार पर भी पौधों को अपना संदेश दे सकते हैं। पर ये डिवाइस अभी विकसित हो रहा है इस लिए इस की efficiency के बारे में अभी से कुछ कहे ना ठिंक नहीं लगता। पर जरा सोच के तो देखो अगर इंसान पेड़ पौधे और जानवरो से बात समझ पाते तो केसा होता।
(do animals use language to communicate)

जानवर भी बात करते है वो अपनी शरीर की अलग-अलग मुद्रा के जरिये या अलग अलग प्रकार के आवाज़ निकाल कर इंसानों से और आपस में बात करते है। 

animal talk


शरू आत में इंसान भी ऐसा ही था वो अपनी फीलिंग को बता ने केलिए अलग अलग तरह के आवाज़ का इस्तमाल करता था। क्यों की तब हमारे पास भाषा नहीं थी, बाद में इंसान आगे बढ़ गया और अलग अलग भाषा का विकास हुआ। जानवर अभी भी उसी दौर में है जिस दौर में पहले इंसान था। 

अब भविष्य में क्या होता है ये देख ने लायक़ होगा।

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