History of India in hindi || History of world in hindi

 

History of India in hindi and History of world in hindi

Archean Era - mesoarchean ( 3.2 - 2.8) billion year ago...

ये है 310 करोड़ साल पहले का भारत...

 

ur supercontinent

 

ये सीर्फ भारत नही है. अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्टिका ओर भारत का एक छोटा से हिसा है. हालांकि इस से पहले भी एक सुपरकॉन्टिनेंट रहे चुका है vaalbara नाम से.

 

ओर उन जमाने में के पृथ्वी पे रह रहे थे बेक्टेरिया जो प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के जरिये खोराक बनाना सिख गए थे. कुछ समय बीतने लगा अभी नाही ऑक्सीजन है ओर नाही कोई जीव जो ऑक्सीजन से जीत हो... लेकिन अभी कुछ सालो में नया होने वाला है पृथ्वी पे... 

 

- Archean - Neoarchean 2.8 - 2.5...

 

Kenorland

लेकिन इस से पहले ये है केनोर लैंड सुपर कॉन्टिनेंट 2.72 billion (272 करोड़) साल पहले जोकि अभी अभी जस्ट बना है. इस के ऊपर ज्वालामुखी ही दिख रही हे.... लेकिन पानी में जीवन था cyanobacteria... blue-green algae. इन की खास बात क्या है पता है. ये पानी के मॉलिक्यूल को तोड़ देता है ओर वेस्ट प्रोडक्ट के तोरपे एल टॉक्सिक वायु छोड़ता है... oxyegan

 

blue-green algae

- Proterozoic Era - Paleoproterozoic - Siderian period -250 - 230 करोड़ साल पहले...

 

proterozoic युग आते आते वातावरण में ऑक्सिजन की मात्रा अछि खासी बढ़ चुकी थी..siderian period में समुन्दर का रंग हरा था... क्यो की उस में बड़ी मात्रा में आयरन कंपाउंड घुला हुआ था.. लेकिन कुछ समय में oxyegn की मात्रा बढ़ ने लगी ओर इन लोहेसे मिलकर magnetite (मैग्नेटाइट ) बना दिया. धीरे-धीरे सागरों का रंग साफ होने लगा, जब समुंदरों में अधिकतम लोहा हट चुका था और ऑक्सीजन को सूखने के लिए पृथ्वी पे कुछ नहीं बचा. तो पृथ्वी के वायुमंडल में जहां अब तक मिथेन गैस की बड़ी भूमिका थी वहां ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगी पृथ्वी पर तब तक कम विकसित हुए अधिकांश जीव कम ऑक्सीजन वाली वायु में पनपने वाले जीव थे जिससे उनकी अधिकांश आबादी इस बढ़ती हुई ऑक्सीजन को न झेल पाने के कारण विलुप्त हो गई। 

ऑक्सीजन बढ़ती रही ओर वायु मंडल में मीथेन की सांद्रता बढ़ती रही. जिस से तापमान पे भारी पर भाव पड़ा क्यो की क्यो की ऑक्सीजन की तुलनामे मीथेन कई अधिक सकती साली ग्रीनहाउस गैस है. जो सूरज की गर्मी को वायुमंडल ओर सतह पर आशिक समय तक रोके रखता है. जिस से माना जाता है की एक भयकर हिम् युग का आरम्भ हुआ. (ह्यूरोनियाई हिमयुग) huronian ice age. इस पूरी गटना को great oxidation event (महान ऑक्सीजन प्रलय) के नामसे जाना जाता है.

NOTE: ice age 2.4 bllion year ago...


- Proterozoic Era - Paleoproterozoic - Rhyacian period ( रायसियाई ) 230 - 205

 

लेकिन कहते है ना समय किसी केलिए रुकता नही है. गटना के 10 करोड़ साल बाद एक दिन... 230 करोड़ साल पहेले Rhyacian period के आरंभ में kenorland supere continet टूट ने लगा. वेसे Rhyacian ग्रीक सब्द हे जिसका मतलब होता हे “stream of lava” (लावा की धार) या “lava flow” (लावा का प्रवाह). उस ज़माने में एक भयकर जवालामुखी विस्फोर्ट हुवा था जिस वजह से बड़ी मात्र में कार्बन दायोक्सिद और अन्य ग्रीनहाउस गेस की मात्र वातावरण में बढ़ गई. जिस वजह से 240 करोड़ साल पहेले सरू हुआ हिमयुग का 210 करोड़ साल के आसपास अंत हुवा. साथ ही ईस पीरियड का भी अन्त हुवा.

 

- proterozoic - Paleoproterozoic - orosiria period (ओरोसिरियाई) 180-205

 

(Vredefort crater created by asteroid impact) ये वही गडा हे जो उस एस्टेरोइड ने 202 करोड़ साल पहेले किया था ये करीब करीब 300 km चोदा हे.

Vredefort crater created 


आज भी prokaryotic यानि की simple cell cyanobactria का राज चल रहा हे. हाला की (eukaryotes) complex cell bactria हो सकते हे लेकीन कूई पुखते साबुत नही हे.

एक और एस्टेरोइड पृथ्वी से टकराता हे... ये पिछले वाले से छोटा था लेकिन 250 KM चोदा गडा तो इसने भी कर दिया हे.. इसे sudbuny basin के नाम से जाना जाता हे.


sudbuny basin


180
करोड़ साल पहेले orosiria period ख़तम होने को आय था. तब अन्दरोनी दबाव के करण continents एक दुसरेके आसपास आने लगे हे जिस वजह से कोलम्बिया सुपर कॉन्टिनेंट बनना सरू ही चूका हे. 

- proterozoic - Paleoproterozoic - statherian period ( स्टाथेरियाई ) 180 – 160 

 

और statherian period आते आते कोलम्बिया सुपर कॉन्टिनेंट बन चूका था... और ये रहा अपना india...

 

Columbia supercontinent

- proterozoic - Mesoproterozoic - calymmian period 160 – 140

 

लेकिन 30 करोड़ साल बाद ये continet वापिस टूट ना सरू हो गया.

 

- proterozoic - Mesoproterozoic - ectasian period 140 – 120 

 

और ये बदलाव का सिलसिला ectasian period में भी चलता रहा... साथ ही में multicellularity जिव भी अस्तित्व में आने लगे और जिन होने रिप्रोडक्शन केलिए सेक्स का अविष्कार किया... 

  जरुर पढ़े: आसमान नीला क्यों दिखता है?

- proterozoic - Mesoproterozoic - stenian period 120 – 100

 

Rodinia supercontinent

ये हे Rodinia supercontinent... यए supercontinent पूरी तरह से बंजर हेहालाकि बीक्टेरिया गहेरे पानी के अन्दर जीवन मूजुद था... ( Note: Timeline of continent 110 - 90)..

 

- Proterozoic - Neoproterozoic - Tonian 100 - 72...

 

लेकिन 100 करोड़ साल पहले अचानक stromatolite (स्ट्रॉमेटोलाइट) जीवाणु कि जनसंख्या में अचानक तीव्र गिरावट अनेलगी ये जीव चटानो जैसे दिखते है. जो सायनोबेक्टरिया कि परत पर परत उगने से उत्पन्न होते है. 

 

stromatolite

कुछ करोड़ सालो में rodinia supercontinent भी टूटने लगा... (75 करोड़ साल पहले टूटा था)... 

 

- Proterozoic - Neoproterozoic - Cryogenian 72 - 63.5 

 

और उसी दौरान पृथ्वी वापिस एक बर्फ का गोला बन ने वाली थी... ये है snowball earth ... जिसे Cryogenian पीरियड में देखा गया था. Cryogenian पीरियड को आम तौर पर दुनिया भर में दो प्रमुख ग्लेशियरों में विभाजित माना जाता है. पहला है sturtian glaciation 72 to 66 करोड़ों साल पहले. और दूसरा है marinoan glaciation 65 करण साल से पीरियड के अंत के बाद Ediacaran पीरियड तक चला... (58.5 )...

 

- Proterozoic - Neoproterozoic - Ediacaran 63.5 - 54.1

 

55 करोड़ साल पहले गोंडवाना लैंड बढ़ने लगा जो भविष्य में पंजियार का भाग होगा. 60 करोड़ साल पहले pannotia सुपरकॉन्टिनेंट भी बनने लगा था. ज्वालामुखी सक्रिय होने के कारण Cryogenian दौर में बनी स्नोबॉल earth भी पीगल ने लगी थी. ओर अपने पुराने रूप में आने लगी थी. और बड़े पैमाने में मल्टीसेल्यूलर लाइफ विकसित होने लगी, अलग-अलग जाति के जीव अस्तित्व में आने लगे. 

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Cambrian 54.1 - 48.54

 

फिर कुछ सालों में जीवो में आंखें भी विकसित होने लगी. हालांकि आंखों का विकास तो बहुत पहले से ही हो चुका था लेकिन अब जीवो की आंखें फोटो भी बनाने लगी थी. इस पीरियड में बहुत सारे नए नए जी अस्तित्व में आए, trilobites का भी अस्तित्व इसी दौरान हुआ था करीब 52.6 करोड़ साल पहले...

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Ordovician 48.54 – 44.34

 

इस युग में भी पानी में नए नए जीव अस्ती तव में आने लगे

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Silurian 44.34 – 41.92

 

सारे कॉन्टिनेंट मूव होने लगे है ओर एक नए supercontinent बना नेकी रेस में लग गए है. पानी के अंदर भी मछलियों कि भी नई नई प्रजाति विकसित होने लगी थी...

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Devonian 41.92 – 35.89

 

ओर करीब 40 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर बड़े पैमाने में जादिया ओर पेड़ अस्तित्व में आने लगे...

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Carboniferous 35.89–29.89

 

ओर करीब 33.5 करोड़ साल पहले pangaea सुपरकॉन्टिनेंट भी बन चुका था... इसमें भारत कहां है देखना चाहोगे...  


ओर उस जमाने के जीव देखने है... ये ओर कोई जीव नहीं है उस जमाने के कीड़े मको से है, ये इतने बड़े हो गए थे क्यों की carboniferous period में ऑक्सीज आज के मुकलबले दुगना हो गया था. कीड़ों में फेफड़े नहीं होते ऑक्शन शरीर के बाहर के हिस्सों से अंदर जाती है और ट्यूब के एक झाल के जरिए शरीर में फैल जाती है. अगर आज के कीड़े मकोड़े इतने बड़े होते तो ऑक्सीजन शरीर में ही रह जाता ओर अंदर पहुंचता ही नहीं लेकिन उस दौरान ऑक्सीजन की मात्रा आज से दुगनी थी इसलिए कीड़े मकोड़े ज्यादा ऑक्सीजन लेने लगे और वो इतने बड़े हो गए...

ओर इस बढ़ी हुई ऑक्सीजन का कारण था.... ये पेड़... उस जमाने में पृथ्वी पर इतने पेड़ थे कि पृथ्वी को planet of tree कहा जा सकता था... पेड़ के अंदर क्लोरोप्लास्ट होते है एक प्रकार कि पेड़ कि (organelle) कोशिकांग  है, जो पेड़ के पत्तो में होती है. वो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लेती है ओर धूप कि मदद से कार्बन ओर ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल को अलग करती है ओर पानी से hydrogen oxygen को अलग करती है. साथ ही में ये अलग हुए hydrogen and carbon की मदद से सुगर बनाता है. जो पेड़ को बड़ा ओर मजबूत बन ने में मदद करता है ओर इसी दौरान वेस्ट प्रोडेक्ट कि तौर पर ऑक्सीजन हवामे छोड़ता है... 

वैसे तो पेड़ मरते तो वो वायु मंडल से अपना हिसाब चुकता कर देता है.. उसका ऑर्गेनिक मैटर ऑक्सीजन के साथ करता है और इस से बनी कार्बन डाइऑक्साइड वापस हवा में चली जाती है. और इससे वायुमंडल में इसकी साइकिल चलती रहती है. लेकिन सड़ने से पहले ये पेड़ खालिया जाय या पेट जमीन में दब जाए तो वह अपने अंदर कार्बन और सौर ऊर्जा को ले जाता है और वायुमंडल में ऑक्सीजन बढ़ती रहती है... 

करीब 30 करोड़ों साल पहले ऐसा ही कुछ हुआ था... जिससे वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती रही ओर इस का फायदा कीड़े मकोड़ों ने लिया ओर इतने बड़े हो गए...

 

- Phanerozoic - Paleozoic - Permian 29.89–25.217...

 

लेकिन इन जीवो की तकदीर इतनी अच्छी रही थी.. जहां आज का साइबेरिया है वहां पे लाखों करोड़ों साल तक ज्वालामुखी फटते रही और इसमें से बहुत अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती रही, जिस वजह से वातावरण बहुत गर्म हो गया. लेकिन दिक्कत की बात यह नहीं थी, बल्कि वो जंगल थे जो जमीन में दब दबकर कोयले में बदल गए थे गए थे. इत्तेफाक से उस समय दबे हुए ज्यादातर जंगल साइबेरिया में थे. लावा की वजह से वह कोयला सुलग गया और जमीन से मीथेन और सल्फर वाली गैस बहार निकलने लगी, साथ में कोयले का धूआ भी बाहर आने लगा इस धुंध और धुवे ने वायुमंडल को प्रदूषित कर दिया. सल्फ्यूरिक एसिड की ढूंढने धूप को रोक लिया और पृथ्वी पर अंधेरा छा गया पूरी पृथ्वी का टेंपरेचर 0 सेल्सियस से भी नीचे चला गया. 

 

फिर कुछ सालों में धमाके धीमी पड़ने लगे. एसिड की धुंध वापिस जमीन पर आ गिरी. लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड हवा में रही जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग होने लगी. सदियों से रही ठंड और अचानक से आई गर्मी की वजह से जानवर और पेड़ पौधों की हालत खस्ता हो गई, मौसम के इतने बड़े बदलाव में खुद को ढालने का इनको मौका ही नहीं मिला. ग्लोबल वॉर्मिंग लगातार बढ़ती रही जिससे समुंद्र की गहराइयों में बर्फ हुआ करती थी. उसका तापमान बढ़ने लगा परंतु पत्तों में जमीं मिथेन वाली बर्फ पिघलनी शुरू हो गई. इससे जो मिथेन गैस निकली वह वायुमंडल में पहुंच गई कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले मिथेन गैस गर्मी को ज्यादा रोकती है इसीलिए जलवायु और गर्म होने लगी.

 

मिथुन स्टेटस फेयर में मौजूद ओजोन की परत को खत्म कर दिया. जिस वजह से पृथ्वी पर के जीवो को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाली परत भी खत्म हो गई. समुद्र में पानी की धाराएं भी ठहर गई. एक ही जगह ठहरे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिससे पानी में मौजूद ज्यादातर जीव मर गए. लेकिन इस तरह के माहौल में भी एक तरह का जीव अभी भी पनप रहा था...बैक्टीरिया... जो वेस्ट प्रोडक्ट की तौर पर खतरनाक हाइड्रोजन सल्फाइड गैस छोड़ते थे. जिसने जमीन पर मौजूद ज्यादातर पेड़-पौधे और जानवर को खत्म कर दिया. इससे ग्रेटड़ाइंग के नाम से जानते हैंक. 90 फ़ीसदी प्रहजिता खत्म हो गई उस हादसे में जमीन पे जो बच्चे हम उसी में से किसी के वंशज है...

(Note: ye gatna Triassic तक चली ओर ये गटना 260 million ya 26 करोड़ साल पहले हुई थी)

 

- Phanerozoic - Mesozoic - Triassic 25.217 – 20.13 

 

पृथ्वी को इस हादसे से निकलने में लाखों साल लग गए. और इस घटना का सबसे बड़ा फायदा हुआ डायनासोर को अब आने वाले कुछ सालों में डायनासोर का राज होने वाला है.

सबसे पहले आते हैं समुद्री राक्षस ichthyosaurs (इथयोसोरस). अब यह कैसे मर गए यह एक क्वेश्चन ही है. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि (climate change) क्लाइमेक्स चेंज इनका जिम्मेदार होना चाहिए. (245 million 24.5 करोड़)

 

पहले छोटे-छोटे डायनासोर आने लगे. Gomphodont, cynodonts and ahynchosaurs... (240 million 24 करोड़) फिर 22.5 करोड़ साल पहले Prosauropods dinosaurs भी आने लगे... पहला coelophysoid dinosaurs भी 22 करोड़ साल बाद दिखा...

 

- Phanerozoic - Mesozoic - Jurassic 20.13–14.50

 

फी यहां से नए नए डायनासोर की प्रजातियां आती गई ओर मरती गई... करीब 16.5 करोड़ साल तक पृथ्वी पे उनका ही राज चला... लेकिन इस के बीच बहोत कुछ हुआ जिसने उनको खत्म कर्डिया...

 

Pangaea supercontinent टूट के दो भागो में बट गया.. (200 million 20 करोड)..

फिर कुछ सालों मे पूरा supercontinent टूट कर छोटे छोटे टुकड़ों में बट गया... ओर ये रहा भारत ये हर साल कुछ इंच कि दुरिसे उत्तर की ओर बढ़ रहा था. लेकिन अभी अभी गुजरात आज के जैसा नहीं था...

 

15 करोड़ साल पहले अंदरूनी दबाव के कारण पिगली चटाने बहार आकर पश्चिमी भारत के एक बड़े विस्तार मे फेल गई. जिस से गुजरात का निर्माण हुआ.. लेकिन अभी भी गुजरात के कई हिस्से गायब है.. अभी भी सौराष्ट्र एक द्वीप जैसा ही नजर आता है... आप पृथ्वी पे कहीं भी जाय आप के परो के नीचे एक गुम हो गई दुनिया दफ़न होगी....

 

- Phanerozoic - Mesozoic - Cretaceous 14.55–6.60

 

खेर आप यकीन नहीं करोगे लेकिन दुनिया का पहला फूल भी 13 करोड़ों साल पहले खिला था... 

 

(65 million years 6.5 करोड़ साल पहेले एक एस्ट्रॉयड करीब 10 से 12 किलोमीटर लंबा था. जब ये पृथ्वी से टकराया तो इस से पूरे वातावरण में धूल कण के गुबार फैल गए, जिस से सूरज की रोशनी पृथ्वी पर आना बंद हो गई ओर पूरी पृथ्वी पे ठंड बढ़ गई. ठंड और भूख की वजह से ज्यादा वजन वाले और बड़े ज्यादातर जानवर मर गए. लेकिन छोटे जानवरों ने जमीन के अंदर शरण ले ली कुछ महीनों में माहौल वापिस ठीक होने लगा और छोटे जानवर जब बाहर आके देखा कि वह बड़े ज्यादातर बड़े जानवर जो उन्हें शिकार बनाते थे वह गायब हो चुके है. अब वह बिना किसी के दर के बहार गुम सकते है. अब यह स्तनधारियों का ग्रह बनने वाला है. 

 

- Phanerozoic - Cenozoic - Paleogene 6.60–2.303 

 

फिर कुछ साल बितने लगे और करीब 4 से 5 करोड़ों साल पहले इंडियन ओसियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के साथ टकराए जिससे हिमालय का निर्माण हुआ. और समय के साथ यह पर्वत और भी बड़े होते गए. 

 

- Phanerozoic - Cenozoic - Neogene 2.303–0.2588 (230.3 - 25.88 लाख साल)

 

यह पर्वत इतने बड़े हो गए कि इस से पृथ्वी के जलवायु में बदलाव आने लगा ओर पृथ्वी ठंडी होने लगी. लेकिन एक और बड़ा बदलाव उत्तर और दक्षिण अमेरिका के मिलने से हुआ... जिसे दुनिया के तमाम महासागरों की लहरे बदल गई और हवा का रुख भी बदल गया. जिसका दुनिया के मौसम पर बड़ा असर पड़ा... 

अफ्रीका के हरे-भरे जंगलों की जगह एका दुका पेड़ों ने ले ली. और ऐसा किस लिए हुआ पता है... (Animaton grass) हालांकि गास तो 5.5 करोड़ साल पहले से ही दुनिया में मौजूद थे. लेकिन अब पूरी दुनिया में बड़ी तादाद में फैलने लगे. आप यकीन नहीं करोगे लेकिन हमें बंदरों से इंसान बनाने का काम इस गास का है. 

दुनिया भर में घास के मैदान फैल गए जिससे पेड़ों की संख्या कम हो गई और बंदरों को खाने की तलाश में पेड़ से नीचे आना पड़ा और इसका फायदा उन बंदरों को मिला जो दो पैरों से लंबी दूरी तय कर पाते थे... इस से वो खड़े होके आने वाले खतरे को नाप सकते थे... 

अब हाथो का इस्तमाल सिर्फ पेड़ों पे चढ़ ने केलिए नहीं रहे गयाथा बल्की हड़िया, टहेलिया ओर खुद कि रक्षा करने के लिए भी होने लगा.

 

- Phanerozoic - Cenozoic - Quaternary (25.9 - 00)...

 

इंसानों की किस्मत बदलने खुद पृथ्वी भी बदली है और यही काम दूसरे ग्रहों के नजर ना आने वाले खिंचाव ने भी किया है.. शुक्र और गुरु ने अपनी ग्रेविटी के खिंचाव के कारण पृथ्वी को अपनी-अपनी और झुका दिया जिससे इसका रास्ता हल्का सा मुड़ गया...

जिससे अब पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर रोशनी कभी ज्यादा तो कभी कम होती रही कई बार गर्मियों में भी ठंड पड़ती रही जिससे ग्लेशियर हर साल दक्षिण की ओर बढ़ते रहे... (25 लाख साल पहले)... ओर करीब 24 लाख साल पहले ice age भी शरू हो चुका था... और यहां इंसान पत्थरों की मदद से हथियार बनाना सीख गया था जिससे अब वो सारे काम कर पाता था जो हाथों से नहीं कर पाता था... (25 - 26 लाख साल पहले)... पिछले 100000 सालों से इंसान आग़ पर कंट्रोल करना जानता है जिससे वह खोराक बचाता था पचा पाता था और ज्यादा कैलरी और ताकत को बचा पाता था.

इसी बीच 1000000 साल पहले गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र के कई प्रदेश ऊपर उठे... इससे पहले सौराष्ट्र एक द्वीप था अब गुजरात भी आज के गुजरात जैसा दिखने लगा था... कुछ लाख सालों में अब इंसानों के गले में आवाज की नली का विकसित होने लगी जिससे अब इंसान और भी ज्यादा जटिल आवाज निकाल पाता था... (2 लाख साल पहले) 

अब हमने बोलना स्टार्ट कर दिया था... अब किसी को किसी के अनुभव के सहारे रहने की जरूरत नहीं थी. अब हर इंसान अपने अनुभव और आईडिया एक दूसरे के साथ शेयर कर पाता था जो दूसरे जानवर नहीं कर पाते थे जिसका हमें बहुत ज्यादा फायदा मिला...

करीब 100000 साल पहले इंसान खोराक की तलाश में अलग-अलग जगह पर भटकना स्टार्ट कर दिया था... अब इंसान दुनिया भर में अनेक देशों में फैल चुका था. जिसका उन्हें बड़ा फायदा मिला अचानक आने वाली मुश्किलों से किसी और जानवर के मुकाबले ज्यादा बचा रहा...

करीब 70000 साल पहले इंसान भटकता भटकता भारत तक पहुंच चुका था. ओर 10000 साल बाद कुछ लोग अंडमान निकोबार के नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड तक पहुंच गए थे और वह आज भी वहीं मौजूद है. यह एक लो ते ऐसे लोग हैं जो आज भी आधुनिक इंसानों से नहीं मिले. वह जानते भी नहीं कि उनके 59.67 square kilometre के बाहर भी एक दुनिया है. यहां तक की माना जाता है कि वह आग लगाना भी नहीं जानते...

90s तक उनसे मिलने की कोशिश की गई पर वह किसी का भी इस आईलैंड पर आना पसंद नहीं करते. यहां तक कि इन्होंने हेलीकॉप्टर पर भी तीरों की बौछार की है.

अब तक पूरी दुनिया में इंसान फैल चुका था. और Ice age ने नए-नए रास्ते खुल दिए थे जिसकी वजह से लोग ऐसे ऐसी जगह पहुंच चुके थे कि जहां पर ऐसे जाना पोसीब्ल नहीं था... फिर एक दिन आइस एज ने ब्रेक लिया ओर बर्फ पिघलने लगी जिससे लोग जहां थे जिस आईलैंड पर थे वहां अटक गए... ( Ice age खत्म लगभग 10,000)... ग्लेशियर पिगल तो उससे कई झीले ( Lake ) ओर नदिया बनी. इन नदी की उपजाऊ जमीन ओर पानी ने इंसान को बदल ना शरु कर दिया... Ice age खत्म हुआ तम पोधे ओर इंसान भारी सख्या में बढ़ने लगे. ओर इंसान एक जगह पर बस्ती बनाके रहे ने लगा... 

धीरे धीरे इंसान खेती करना सीख गया, जिस से इंसान सीकर केलिए इतने बड़े एरिया में भटक ने कि वजह मात्र इतने से एरिया मे खुद को जीने केलिए खाने का इंतजाम कर लेता था... जिस से उसकी ताकत ओर एनर्जी की बचत होने लगी... पर कई रेगिस्तानी इलाकों में रहे रहे इंसान केलिए ये पॉसिबल नहीं था. ओर जिन के पास पोधो ओर पालतू जन वरो का ताल मेल था वो ज्यादा सकती साली बन गया... 

पर यहां पर हमारा फोकस सिर्फ भारत पर रहने वाला है इसलिए बाहर की दुनिया पर ज्यादा ध्यान नहीं देंगे... भारत में इंसान को विक्स ने केलिए जगह मिल चुकी थी... सिंधु नदी.. ज्यादा तर दुनिया में इंसानों ने खेती करना और खुद की जरूरियात केलिए जानवरों को पालना स्टार्ट कर दिया था... धीरे धीरे इंसान समाज ओर शहर बना ना सरू कर्दिया था. कई बार जरूरत से ज्यादा अनाज हो जाता था और कई बार कम इसीलिए इसी समस्या के समाधान के लिए मार्केट को विकसित किया गया होगा...

इस मार्केट की वजह से अब अनाज हर वह जगह पहुंच पाता था जहां पर उसे उगाना मुमकिन ना हो. अब इंसान अपने साथ में जानवरों से बहुत आगे निकल चुका था. जरूरत के हिसाब से नगर बनाएंगे और नगर के लिए राजा बनाया गया. राजा की रक्षा के लिए सिपाही नियुक्त किए गए... वक्त के साथ पृथ्वी पर बहुत सारे बदलाव हुए. कई जीव मरे और कई जीव जन में पृथ्वी पर जो जीव सबसे ज्यादा जीता है उसकी उम्र भी हमारे इस ग्रह की उम्र उसके सामने कुछ भी नहीं है, इसलिए यह जाहिर है कि कोई एक जीव इस पूरे पैटर्न को नहीं देख सकता. जिससे महाद्वीप बदलें, जवाला जलवायु बदलें और जीवन का इतना विकास हुआ. सही मायनों में देखे तो हम खुद अपने आप के लिए एक राज की तरह है. जो आज भी अपनी जड़ को खोज रहा है.

 

6500 ईसा पूर्व के आस पास अब इंसान भारत में धीरे-धीरे सिंधु घाटी सभ्यता में विकसित होने लगा था, दक्षिण एशिया में पहली शहरी संस्कृति, जो अब पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में है वो 2500 से 1800 ई.पू. के दौरान पनपी। प्राचीन मिस्र (ancient Egypt) और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिन्धु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी।

19th century के बाद के विद्वानों मे प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा। और पहले पंजाब में बस गया। और यहीं पे ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई।

पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर 1900 ईसापूर्व के आसपास सिन्धु घाटी सभ्यता का आकस्मिक पतन हो गया। जोकि आज भी एक मिस्ट्री बनी हुई है। लेकिन तब तक भारत में कई सारी और जगहों पर इंसान बस चुका था और बहुत सारे नगर बना चुका था. 

यह सभ्यता मुख्यतः 2600 ई॰पू॰ से 1900 ई॰पू॰ तक रही। ऐसा आभास होता है कि इस सभ्यता का अपने अंतिम चरण में पतन (ह्रासोन्मुख) हुआ था। वाल्मिकि रामायण के उत्तरकाण्ड के १००वां और १०१वां सर्ग मे है कि सिन्धु नदी और उसके तट पर बसे गन्धर्वों से राम के भाई भरत ने अपने पुत्र तक्ष के लिये भीषण युद्ध किया था जो सात दिन और सात रात तक चला था। 

सिन्धु घाटी सभ्यता के अवसान के पीछे विभिन्न तर्क दिये जाते हैं जैसे: आक्रमण, जलवायु परिवर्तन एवं पारिस्थितिक असंतुलन, बाढ़ तथा भू-तात्विक परिवर्तन, महामारी, आर्थिक कारण आदि। ऐसा लगता है कि इस सभ्यता के पतन का कोई एक कारण नहीं था बल्कि विभिन्न कारणों के मेल से ऐसा हुआ। जो अलग-अलग समय में या एक साथ होने कि सम्भावना है। मोहनजोदड़ो में नग‍र और जल निकास कि व्यवस्था से महामारी कि सम्भावना कम लगती है। भीषण अग्निकान्ड के भी प्रमाण प्राप्त हुए है। मोहनजोदड़ो के एक कमरे से १४ नर कंकाल मिले है जो आक्रमण, आगजनी, महामारी के संकेत है।

1500 ईसा पूर्व के आस पास से वैदिक युग का प्रारंभ हो गया था... आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका सम्बन्ध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा।

वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यों के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से 3 - 4 हजार साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी।

500 से 700 ईसा पूर्व में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। 

540-493 ईसा पूर्व बिम्बिसार का शासनकाल बिम्बिसार एक कूटनीतिज्ञ और दूरदर्शी शासक था। उसने प्रमुख राजवंशों में वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर राज्य को फैलाया। सबसे पहले उसने लिच्छवि गणराज्य के शासक चेतक की पुत्री चेल्लना के साथ विवाह किया। दूसरा प्रमुख वैवाहिक सम्बन्ध कौशल राजा प्रसेनजीत की बहन महाकौशला के साथ विवाह किया। इसके बाद भद्र देश की राजकुमारी क्षेमा के साथ विवाह किया।

महावग्ग के अनुसार बिम्बिसार की 500 रानियाँ थीं। उसने अवंति के शक्‍तिशाली राजा चन्द्र प्रद्योत के साथ दोस्ताना सम्बन्ध बनाया। सिन्ध के शासक रूद्रायन तथा गांधार के मुक्‍कु रगति से भी उसका दोस्ताना सम्बन्ध था। उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था वहाँ अपने पुत्र अजातशत्रु को उपराजा नियुक्‍त किया था। बिम्बिसार महात्मा बुद्धका मित्र और संरक्षक था। विनयपिटक के अनुसार बुद्ध से मिलने के बाद उसने बौद्ध धर्म को ग्रहण किया, लेकिन जैन और ब्राह्मण धर्म के प्रति उसकी सहिष्णुता थी। बिम्बिसार ने करीब 52 वर्षों तक शासन किया। बौद्ध और जैन ग्रन्थानुसार उसके पुत्र अजातशत्रु ने उसे बन्दी बनाकर कारागार में डाल दिया था जहाँ उसका 492 ई. पू. में निधन हो गया। 

ओर इस बीच 517 ईसा पूर्व साइरस और डेरियस... (फारस (Persia)) हाल के ईरान के हख़ामनी साम्राज्य (Achaemenid empire) के सम्राट ने गांधार पर कब्जा कर लिया।

ओर 500 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में मगध राज्य (मगध साम्राज्य) का उदय हुआ.

400 से 500 ईसा पूर्व में महाभारत और रामायण की रचना हुई. 

362-321 ईसा पूर्व उत्तर और मध्य भारत में नंद वंश का शासन था. ओर सायद ये एकलोता वंस था जो शुद्र था। इस वंश के प्रथम राजा महापद्मनंद थे, सम्राट महापदम नंद को भारत का प्रथम ऐतिहासिक चक्रवर्ती सम्राट होने का गौरव प्राप्त है। ओर इन का जन्म शिशुनाग वंश के अंतिम राजा महानंद की दासी के गर्भ से हुआ था। जो नाई जाति से आते थे। बाकी ज्यादा जान करी केलिए मे इस की लिंक डिस्क्रिप्शन मे दे देगा...

326 ईसा पूर्व सिकंदर ने सिंधु नदी को पार किया, सिकंदर और पोरस के बीच हायडापेस का युद्ध- प्राचीन ग्रीक भाषा में झेलम नदी को हायडापेस (Hydaspes) और ऋग्वेद में वितस्ता कहा गया है। पोरस का साम्राज्य वर्तमान पंजाब में झेलम और चेनाब नदियों तक था. इस राजा को भारत का रकसक भी कहा जा सकता है. क्यों कि इन होने सिकंदर Alexander the Great जो विश्व विजेता बन ने नीले थे उनको काटे की टकर दी. हालांकि सिकंदर बहुत ही ज्यादा सकती साली ओर बड़ी सेना होने के कारण जीत गया था. लेकिन जीत के बावजूद भी उसकी सेना आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. हाल की बाद मे सिकंदर ओर पोरस के बीच में दोस्ती हो गई थी... 

 ''जब पोरस हार गए तब उन्हें सिकंदर के सामने पेश किया गया. सिकंदर ने पोरस से सवाल किया कि उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाए? इस सवाल के जवाब में पोरस ने सिकंदर से बड़े आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ कहा कि ठीक वैसा, जैसा एक शासक दूसरे शासक के साथ करता है.''

सिकंदर को उनका आत्मविश्वास से भरा जवाब पसंद आया और उसके बाद सिकंदर को महसूस हुआ कि उनकी सेना को यहां काफ़ी संघर्ष करना पड़ा है और नुक़सान झेलना पड़ा है. इस तरह के नुक़सान और टकराव से बचने के लिए सिकंदर ने पोरस से दोस्ताना संबंध स्थापित किए ताकि आगे किसी तरह की मदद के लिए पोरस का साथ हासिल किया जा सके. कई विद्वानों का कहना है कि ये दोस्ती सिर्फ उसकी कूटनीति की चाल थी. जो ऐसा लगता भी है, पर जोभी हो बाद ने सिकंदर आगे नहीं बढ़ा ओर झेलम नदी के किनारे बढ़ते हुए अपने प्रदेश की तरफ़ लौटने लगा, ओर रास्ते में उनका स्वास्थ्य बिगड़ ने से बेबीलोनिया पहुंचकर उसका निधन हो गया ।

322-298 ईसा पूर्व मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त (Chandragupta) का शासनकाल आता है. जिन होने सिर्फ 25 साल की उम्र में नंदशासक धननंद को हराके पटलीपुत्र मे मौर्य वंश की स्थापना की. बाद में कुछ इतना बड़ा था Maurya Empire चन्द्रगुप्त के समय में... 

बाद मे 297 से 272 ईसा पूर्व तक बिन्दुसार ओर 272 से 237 ईसा पूर्व तक अशोक का शासनकाल। सम्राट अशोक इस वंश के बहुत ही सकती साली राजा थे. जिन होने करीब पूरे भारत में Maurya Empire को फैला दिया था... उस दौर मे कुछ इतना बड़ा था Maurya Empire.... (साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका।)

आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबों का अधिकार हो गया। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। 1556 में विजय नगर का पतन हो गया। सन् 1526 में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। 1659 में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात (बलपूर्वक) मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और 1857 के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी 1947 में मिली जिसमें महात्मा गांधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। 1947 के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ।

हम काफी लम्बा सफर तय कर के यह तक पहुंचे है. लेकिन इस से इन प्लेट टेक्टोनिक्स को ओर कभी कबार आरही उल्का पिड़को कोई फर्क नहीं पड़ता. चाहे पृथ्वी की सतह पर कुछ भी चल रहा हो, चाहे कोई भी छोटे बड़े बदलाव हो रहे हो इन को कोई फर्क ही नहीं पड़ता की इस ग्रह की सतह पर अरबों सालो से क्या चल रहा है.

ओर कहीं ना कहीं अब इनकी मदद हम भी कर रहे है. आज वायुमंडल में कितनी इतनी रफ्तार से कार्बन डाइऑक्साइड उड़े ले जा रहे हैं. जितनी पहले हुए हादसों के बाद पृथ्वी पर कभी पैदा नहीं हुई. जिससे बड़े पैमाने पर जिओ का सफाया हुआ था. इससे वही जलवायु बन रही है जो पिछली बार डायनासॉर के जमाने में बनी थी. यह हमारे तटीय शहरों को दुआ देगी वायुमंडल को तहस-नहस कर देगी और हमारे हमारे लिए खाने का इंतजाम करना भी मुश्किल पड़ जाएगा.... डायनासोर को तो उल्कापिंड आता हुआ दिखा भी नहीं था... हमारे पास क्या बहाना होगा...

हमारा youtube चेनल पर जरुर मुलाकात करे...

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