हम कौन हैं इस ब्रह्मांड में? who are we in this universe?


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हमारा ब्रह्मांड कितना बड़ा है इसमें ढेर सारी गैलेक्सिया है, ढेर सारे ग्रह है। क्या इन सारे ग्रह पर जीवन नहीं है क्या सिर्फ पृथ्वी पर ही जीवन है। अगर है तो आज तक हम किसी भी एलियन सिंगल को क्यों नहीं ढूंढ पाए। ये सारे सवाल होना जायज है। क्यों की हमने ब्रह्मांड के बहुत सारे ग्रहों को खंगाला है। और तो और रेडियो , टेलीविजन के वपरास करने के लिए हम जो रेडियो तरंगें छोड़ते हैं वह भी कई प्रकाश वर्ष छोड़ चुके होंगे। क्योंकि वह तरंगे हर साल एक प्रकाश वर्ष तक का सफर तय करती है और हम इसका प्रयोग करीब करीब 70 साल से कर रहे हैं। तो मुमकिन है कि वह तरंगे कई तारों के कई ग्रहों तक पहुंच चुकी होगी। लेकिन अभीतक हमे एक भी ग्रह पे जीवन नहीं मिला। इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं, अगर हम यह उम्मीद करते हैं कि दूसरी सभ्यता के लोग भी रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल करते हैं तो हमारी सोच पहले वाली पीढ़ियों से अलग कैसे हुई, जो तोप के गोले पर बैठकर चांद पर जाने के खाब देखते थे। हो सकता है वह सभ्यता किसी और कम्युनिकेशन के तरीके का इस्तेमाल करती हो। हो सकता है कि वो भी तरंगे छोड़ रहे हो और वो तरंगे हमरे पास में ही हो लेकिन हम अभी तक उस तकनीक के बारेमें नहीं जानते हो।

इस तेर ते हुए गोले को हमने पृथ्वी कहां है और खुद को इंसान। आसपास के लोगों के साथ बातचीत करते हैं। हम समूहों में एक दूसरे की पहचान करते हैं, ऐसा करना वास्तव में शानदार है। हम बातचीत करने के लिए हवा में कंपन में हेरफेर कर सकते हैं। वास्तव में संचार प्रमुख है।  कल्पना कीजिए कि यदि पिछली सभी पीढ़ियां और प्रजातियां हम एक-दूसरे के साथ बातचीत नहीं कर पाते होते तो। आज ये शहर नाहोती, देश ना होते, धर्म ना होते, धर्मगुरु ना होते, इवन भगवान भी नाहोते। हम कहेते हमारा धर्म श्रेष्ठ है, लेकिन ये नहीं जानते कि इस धर्म को बनाने वाले का जन्म कैसे हुआ। विज्ञान कहेता है बिग बैंग से सब बना लेकी बिग बैंग केसे हुवा कोई नहीं जानता, धर्म कहेता भगवन ने सबको बनाया पर भगवान केसे जन्मे कोई नहीं जानता। क्या हम वाकई में हे भी या फिर ये भी कोई कल्पना है। कहीं ऐसा तो नहीं जिसे हम ब्रह्मांड बोल रहे हैं वह तो केवल एक बड़े से ब्रह्मांड के महासागर की एक बूंद है। छोटा महेसुस कर रहे होना ब्रह्मांड के मुकाबले हम बहोत छोटे है। हम छोटे से ग्रह के छोटे से प्राणी हो सकते है पर हमारी सोच छोटी नहीं है। हालाकि हमारी सोच नई ही हे। सिर्फ चार सदिओ पहले हमारी छोटी सी दुनिया ब्रह्मांड के बारेमे अनजान थी। और उस वक्त टेलिस्कोप भी नहीं थे। तब हम पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र मानते थे और मानते थे कि सारे तारे ग्रह और सूर्य पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। और इसको गलत बोलने वालो को मौत की सजा दी जाती थी। शायद तब के लोग डरते थे कि पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र ना मानना भगवान के ना मानने के बराबर हो जाता। क्यों की ग्रंथ तो पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र मानता है।

लेकिन हम अगर हम बिग बेंग को सही मानते है तो इस नजरिए से भी एक बार देखना चाहिए। यह सोचो यह आपका घर है। और मैं आके आपको कहुं आपके घर को किसी ने नहीं बनाया यह अपने आप बना है। तो क्या आप मुझे गलत साबित कर सकते हो, बिकुल कर सकते हो। और वो भी सिर्फ एक शब्द कह के "व्यवस्था"।

व्यवस्था कभी अपने आप नहीं बन सकती। घर में आने जाने के लिए दारवाजे, हवा के लिए खिड़कियां, ऊपर और नीचे जाने के लिए सीढ़ियां, और छत से कोई गिरना जाए इसलिए छत पर रेलिंग लगाई गई है। यह सब व्यवस्था होती है। लेकिन आपका घर अगर अपने आप बना होता तो यकीनन इतनी व्यवस्था नहीं होती।

अब आप प्राकृतिक और देखो। क्या आपको इसमे कोई व्यवस्था नहीं दिखती। हम o2 लेके co2 छोड़ते हैं। वहीं पैड co2 लेके o2 छोड़ते हैं। पानी बादल बनता है, जिससे बारिश होती है और यह पेड़ पौधे जिंदा रहे पाते हैं और हम इंसान खेती कर पाते हैं। यह कोई व्यवस्था नहीं है। यकीनन यह व्यवस्था अपने आप नहीं बन सकती जिस प्राकृतिक ने यह सब बना है। उसे आप भगवान, अल्लाह, गॉड, वाहेगुरु, कुछ भी कह सकते हो। यह आपकी मान्यता ऑपर निर्भर कता है। लेकिन फिर अब सवाल यह उठता है कि भगवान ने हमें बनाया तो भगवान को किसने बनाया। भगवान कहां से आए।

अगर हम ग्रंथों की माने। तो हम इंसानों को भगवान ने बनाया है। क्योंकि अगर हम बंदरों में से बने हैं, तो यह बंदर अभी तक बंदर ही क्यों रहे गए हैं। इंसान क्यों नहीं बने। मतलब पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हम इंसानों को स्वयं ईश्वर ने बनाया है। और किसी खास तरह के ईश्वरीय सेब पानेसे हमें इतनी बुद्धिमता आई है। जिसे गलत साबित किया गया डार्विन की थ्योरी, थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन ने। जिसमें उन्होंने बताया कि किसी भगवान ने हमें नहीं बनाया और ना की किसी फल खाने से हम्में इतनी बुद्धि आई है। तो फिर अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि यह बंदर इंसान क्यों नहीं बने। इन पर एवोल्यूशन काम क्यों नहीं आया। इसका बड़ा आसान सा जवाब है। कि हम बंदरों से नहीं बने, बल्कि हमें बंदर ही है। मतलब एक अलग प्रजाति के बंदर हैं। जबकि अफ्रीका के जंगल में पाए जाने वाले चिंपांजी यहां गोरिला अलग प्रजाति के बंदर है।हम इंसान आज जहां है वह हम सीखने की और परिस्थितियों के मुताबिक अपने आप को ढालने की वजह से है।हम जो चीज सीखते हैं वह भाषा की वज़ह से हमारे वंशजों को सिखाते हैं। और वह आगे इस तरह हम इतने होशियार बन पाए हैं। ना किसी जादुई सेब खाकर।

हम इंसान खेती करना सीखे तब से हम अपना समय और शक्ति का बचत करने लगे। तब हम अपने फ्री टाइम में यह सोचने लगे होंगे कि हमें किसने बनाया और इस प्रकृति को किसने बनाया। तब हमने भगवान की खोज की होगी। यहां मैं भगवान के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठा रहा हूं। प्राकृति की शक्तियों के बारे में अंदाज लगाना हम इंसानों की बस की बात नहीं है। भगवान कोई अलौकिक शक्ति है, जिनका कोई रूप नहीं है। कोई आकार नहीं है। वह हमें जीवित रखने वाली हर एक चीज में है। यह हवा भगवान है, यह खाना भगवान है, यह पानी भगवान है, हर वो चीज भगवान है जो हमें जीवित रख रही है।

याद रखना दोस्तों कोई किताब आसमान से नहीं उतरी। इस पूरी सृष्टि को संभालने वाले के पास इतना समय नहीं है कि वो हमारे जैसे मामूली से जीवो के लिए किताब लिख के भेजे। यह सारे ऐश्वर्या ग्रंथ हम इंसानों हैं ने ही लिखे हैं।

हम किस चीज के लिए लग रहे हैं। हर धर्म के लोग कह रहे हैं कि मैं अपने धर्म की रक्षा कर रहा हूं, अरे भाई तू उसकी रक्षा कर रहा है जिसने यह विशाल ब्रह्मांड बनाया। तेरे को क्या लग रहा है उन्हें तुम्हारी रक्षक जरूरत है। अरे यार इस ब्रह्मांड में तेरे हैसियत ही क्या है। तुझे क्या लगता है जो पल भर में दुनिया को मिट्टी में मिला सकता है उससे तेरे रक्षा की जरूरत है। उसी की बनाई गंगा के जल तू उस पर ही छिड़क ता है और उसी की बनाई प्राकृतिक से फूल तोड़ कर उसी पर चढ़ाता है और सोचता है कि आप भगवान खुस हो जाएंगे। नहीं भाई नहीं होंगे।

हमारे गरीब देश में मंदिर और मस्जिद बहुत अमीर है। इनमें 1 साल में इतना दान आता जाता है कि इन पैसों को गरीबों में बांट दिया जाए तो हमारे देश की गरीबी ही दूर हो जाएगी। दोस्तों यहां मैं आपकी श्रद्धा कॉ नहीं तोड़ ना चाहता, लेकिन भगवान को सोना चांदी हीरे मोती में कैसे दिलचस्पी हो सकती है उन्होंने खुद तो इसे बनाया है। आप सभी इंसानों का प्यार से देखो, किसी को भी दर्द मत दो तकलीफ मत दो खुद भी शांति से जियो और दूसरों को भी शांति से जीने दो। यही भगवान की सच्ची भक्ति होगी।

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