dil kyu dhadkta hai

दुनिया में चाहे कोई भी चीज हो उसे चलने के लिए किसी ना किसी तरह की ऊर्जा की जरूरत लगती ही है। चाहे वो टीवी हो फ्री हो कार हो बाइक हो या इंसान का दिल, सबको चलने के लिए किसी ना किसी तरह की उर्जा की जरूरत लगती है। फिर चाहे वह किसी भी स्वरूप में हो मोटरसाइकिल और कार में वो पेट्रोल या डीजल के स्वरूप में हो। या टीवी फ्रिज जैसे उपकरणों में वह इलेक्ट्रिसिटी के स्वरूप में हो। इसी तरह हमारे हृदय को धड़कने के लिए भी कसी तरह की ऊर्जा की जरूरत तो लगती हैं। आज के इस वीडियो में हम यही जानने वाले हैं कि हृदय को धड़कने के लिए ऊर्जा कहां से मिलती है।



दिल का मुख्य कार्य बॉडी में ब्लड को पंपिंग करने का है। और पंप करने के लिए दिल का सिकुड़ना बहुत जरूरी है। चलिए पहले हम दिल कैसे काम करता है यह समझ लेते हैं।

तो आप जानते ही होंगे कि हृदय के 4 हिस्से होते है। ऊपर के दो हिस्सों को कहते हैं एट्रियम और नीचे के दो हिस्से को वेंट्रिकल कहते हैं। हृदय में से रक्त ले जाने और लाने के लिए पाइप रूपी नली काये होती है। जीने रक्त वाहिकाओं कहते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अगर हम छोटी बड़ी नली काओ को जोड़ ले तो वह करीब करीब 100000 किलोमीटर तक लंबी हो सकती है। इतनी लंबाई में आप पृथ्वी को 2.5 बार लपेट लो। सोचो इतनी नलिका ये तो हमारे शरीर में होती है।

 तो इन ऊपरी ट्यूब से ऊपर का और निचली ट्युब से नीचे का रक्त हार्ड में प्रवेश करता है। दोनो मिलकर इस राइट एट्रियम मे अशुद्ध यानी कि कम ऑक्सीजन वाला रक्त छोड़ है। इस एट्रियम मे सिर्फ नीचे की साइड ही खुलने वाला एक वोल होता है। और वह तभी खुलता है जब हृदय फैलता है। तो इस तरह से अशुद्ध लोई एट्रियम से वेंट्रिकल मैं प्रवेश करता है। और जब वापस हृदय सिकुडेगा तो वो रकत उपर के वोल्व से इन ट्युष की मदद से बहार चला जायगा । लेकिन ये रक्त यहासे बाकी शरीर मे नही बलकी फेफड़ों में जाएगा । और वहां से ये रक्त ओक्सिज युक्त और शुद्ध होकर आएगा । और वापिस ह्रदय में आएगा । लेकिन इस पर राइट नहीं बल्कि लेफ्ट एट्रियम सैरत प्रवेश करेगा और लेफ्ट वेंट्रिकल मे जाएगा और वहां से पूरे शरीर में । तो यहां तक बात आपको समझ में आ गई होगी । लेकिन यह सब होने के लिए जरूरी है हृदय का धड़कना । इसलिए हृदय को धड़काने का काम करते है । कुछ विद्युत संकेत जो SA Node से आते है जिसे हृदय का पेसमेकर कहा जाता है। हमारे हृदय की मांसपेशी छोटी कोशिकाओं से बनी होती है।हृदय की विद्युत प्रणाली इन कोशिकाओं के माध्यम से विद्युत संकेत भेजकर आपके दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है।

heart



SA नोड एट्रियम के रक्त के संपर्क में आते ही एक विद्युत आवेग भेजता है। यानी कि Electric impulse भेजता है । विद्युत संकेत आपके SA नोड से यह संकेत फाइबर की मदद से AV नोड मे भेजता है । और AV नोद विद्युत सिग्नल बंडल शाखाएं के जरिए बंडल से जुड़ी, ये निचले वेंट्रिकल तक ले जाता हैं।.

और जब ये सभी घटक एक साथ काम करती हैं, जैसा कि उसे करना चाहिए, तो लगभग प्रति मिनट 60 से 70 बार दिल धड़कता है ।

वैसे आपको बता दूं अब SA नोद के काम बंद कर देने पे अब कृत्रिम पेसमेकर लगाया जाता है । जो बिल्कुल SA नोड की तरह इलेक्ट्रिक संकेत भेजता है । जो बैटरी पर काम करता है । लेकिन अभी यह सब तकनीकी शुरुआती स्तर पर है ।

दिल की बात चल रही है तो हम थोड़ा सा हार्ड अटैक के बारे में जान लेते हैं। आखिर हार्ड अटैक क्यों आता है?

दिल का दौरा उस स्थिति में पड़ सकता है, जब किसी व्यक्ति के दिल तक रक्त प्रवाह (Blood Flow) में ब्लॉकेज हो जाती है। यह ब्लॉकेज फैट, कॉलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों के बनने के कारण होती है, धमनियों में ठोस पदार्थ बन जाता है, जिसकी वजह से दिल पर दबाव पड़ता है। और खून का सप्लाई रुक जाता है। इसी स्थिति का परिणाम होता है हार्ट अटैक होता है।

पर कई लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ड अटैक को एक ही समझते हैं। दरअसल इन दोनों में डिफरेंस है, कार्डियक अरेस्ट के मुकाबले हार्ट अटैक में चानस ज्यादा है कि इंसान बच जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कार्डियक अरेस्ट में दिल का धड़कना ही रुक जाता है। जिससे दिमाग और शरीर की बाकी जरूरी जगहो पर खून का सप्लाई एकदम से रुक जाता है। और चांसीस है कि चंद पलों में इंसान की मृत्यु हो जाए।

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