Why you should never drink water standing up in Hindi myth


दोस्तो आपने बहुत सारे आर्टिकल्स और वीडियोस में देखा और पढ़ा होगा खड़े खड़े पानी नहीं पीना चाहिए, भोजन समय और भोजन के बाद पानी नहीं पीना चाहिए। आज हम इन सभी तथ्यों की सत्यता की पुष्टि करेंगे। कि इन तथ्यों में कितनी सत्यता है। तो सबसे पहला।

1). खड़े होकर पानी पीने से शरीर को होते है गंभीर नुकसान।

दावा नंबर 1. जब अगर आप खड़े होकर पानी पीते हो, तब इसोफेगस (अन्ननलिका) के जरिए पानी प्रेशर से पेट में पहुंचता है। इस प्रेशर की वजह से पेट के आसपास की जगह और डाइजेस्टिव सिस्टम को नुकसान पहुंचता है।

पड़ताल: सबसे पहले तो हम पानी ही पी रहे है कोई पत्थर नहीं डाल रहे नुकसान होगा। और रही बात इसोफेगस की तो सभी भोजन वहीं से गुजर ते है फिर चाहे वो लिक्वड हो या अन्य भोजन अन्ननलिका के जरिए ही जाता है। कोई अपने कानों से नहीं डालता पानी पेट के अंदर। और ये अन्ननलिका कोई पाइप की तरह नहीं होती कि इसमें कुछ भी डाला और वो फुर देता अन्दर गिर गया। इस के बारे में तो में आप को आगे विस्तार से बताउ गा। फिलहाल, fit thequint नाम की एक वेबसाइट पर छपे आर्टिकल में क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट रूपाली दत्ता के बयान के अनुसार किसी भी तरीके से आप पानी पीजिए कोई फर्क नहीं पड़ता बस, बहुत जल्दबाजी में पानी गटकने से परहेज रहे। क्योंकि ऐसा करने से आप को गले में घुटन हो सकती है।

और तो और हम अगर कॉमन सेंस लगाए तो भी ये समझ सकते है कि की, खड़े होकर पानी पिनेसे डाइजेस्टिव सिस्टम कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। ओर नाही पानी प्रेशर से पेट में पहुंचता है। खेर दूसरा दावा देखते हैं।

दावा नंबर 2.  खड़े होकर पानी पीने से शरीर को पानी से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स (Nutrients) का फायदा नहीं होता है।

पाड़ताल: अरे यार पता नहीं ये सब लिखने वाले कोनसी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेके आए है। इस दावे की तो पड़ताल करने की ही क्या जरूरत है। सभी जानते हैं पानी में न्यूट्रिएंट्स होते ही नहीं। यह दामन तो पूरी तरह से भ्रामक साबित हो ता है। पानी आप को न्यूट्रिएंट्स गैन करने में मदद कर सकता है, लेकिन पानी में से आप को कोई न्यूट्रिएंट्स नहीं मिलते। आप पानी खड़े होके पिए या बैठ के वो जाएगा तो आपके पेट में ही है। खड़े रहें नेसे कोई पानी दूसरा रास्ता नहीं बलना लेगा। जाना तो उसे उसी रास्ते से है।

दावा नंबर 3. पानी के प्रेशर से पेट में जाने की वजह से सभी इंप्योरिटीज (अशुद्धियों) ब्लैडर में जमा हो जाती हैं, जिससे किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

पड़ताल: आप जो कुछ भी खाते या पीते हैं , वो अन्ननलिका के जरिए पेट तक पहुंचता है और फिर आंत तक। जहां से उसका अवशोषण होता है। कुछ भी डायरेक्ट किडनी या जोड़ों में नहीं चला जाता। पानी ब्लड के साथ फ्लो करता है और शरीर के सभी अंगों तक पहुंचता है। इस में अशुद्धियों की तो कोई बात ही नहीं रहती। 

दावाव नंबर 4. खड़े होकर पानी पीने से फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। फूड पाइप और विंड पाइप में ऑक्सीजन की सप्लाई रूक जाती है। जिससे दिल संबंधी बीमारी होने लगती है।

पदताल: सबसे पहले तो में आप को फूड पाइप और विंड पाइप के बारे में एक विडियो के द्वारा समझने वाला हूं। इस केलिए आप click here... पर क्लिक कर के विडियो देखो। और हा जारहे हो तो फॉलो भी कर लेना 😜। 

 
तो ये सिस्टम कुछ इस तरह से काम करता है। आप कुछ भी खाना जो मुंह से पेट के अंदर डालते है, तो वो एपिग्लॉटिस के जरिए आपकी विंड पाइप को ब्लॉक करता है। जिस से कोई खाना और पानी आप के फेफड़ो में ना चला जाय। आप को यकीन नहीं आता तो आप खाने और पीने के साथ सास लेने की और निकाल ने की कोसिस करना आप ये नहीं कर पाएंगे। तो दावे के अनुसार खड़े होकर पानी पीने से फूड पाइप और विंड पाइप में ऑक्सीजन की सप्लाई रूक जाती है। तो वो किसी पोजिशन में रहो वोतो रुकनी ही है। इस लिए ये दावा भी भ्रामक निकला।

दावाव नंबर 5. खड़े खड़े पानी पिने से पानी का दबाव घुटनों पर पड़ता है। और इससे घुटनों से जुड़ी बीमारियां हो सकती है।
पदताल:  ये तो मैने आप को पहले ही बताया था कि आप जो कुछ भी खाते या पीते हैं , वो अन्ननलिका के जरिए पेट तक पहुंचता है और फिर आंत तक जहां से उसका अवशोषण होता है। कुछ भी डायरेक्ट किडनी या जोड़ों में नहीं चला जाता। इस दावे का तो कोई तुक ही नहीं बैठता ये तो आप कॉमन सेंस लगाकर भी समझ सकते हैं। कि पानी पीने से घुटनों पर क्या फर्क पड़ेगा। क्योंकि इतने सारे मैराथन रनर है वह भी तो खड़े-खड़े एवं दौड़ते दौड़ते पानी पीते हैं। हा खाने के मामले में यह बात गलत साबित हो सकती है। क्योंकि चलते फिरते टाईम जो भी खून का प्रवाह है वो आपके हाथों और पैरों की साइड मूव होजता है। जिस वजह से जितनी मात्रा में खून हमारे पाचन तंत्र को चाहिए उतनी मात्रा में नहीं पहुंच पता। जबकि पानी को सॉलिड फूड आइटम की तरह तोड़ने और पचाने की जरूरत नहीं होती। लेकिन इस खाने वाली बात पर भी कोई साइंटिफिक रिसर्च नहीं हुई।

दरअसल इंटरनेट पर जीतने भी दावे हैं उनके पीछे कोई रिसर्च नहीं है। बस यह उसी 4 शब्दों में घूमते रहते हैं। खड़े होकर पानी पीने से पानी का प्रेशर बनेगा और प्रेशर से आपकी डाइजेस्टिव सिस्टम खराब हो जाएगी। या घुटनों में दर्द होने लगेंगा, बस! कोई लॉजिकल पुरावा ही नहीं। और ऐसी भी बात नहीं है कि यह सब दावे छोटी मोटी वेबसाइट्स करती है। कइ बड़ी-बड़ी वेबसाइट्स है जो इस तरह के दावो का प्रचार करती है। यकीन ना हो तो एक बार सर्च करके देख लो। 


2). क्या भोजन समय और भोजन के बाद पानी नहीं पीना चाहिए?


भोजन के समय पानी पीने के बहुत सारे कारणों मेस मुख्य कारण जो ज्यादा तर लोग और आयुर्वेद बताते है वो कुछ एसा है। भोजन के साथ पानी पीने से स्टमक एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइम पतला हो जाता है। जिसके कारण आपके शरीर को भोजन पचाना मुश्किल हो जाता है।

इस दावे का अर्थ है कि आपका पाचन तंत्र अपने स्राव को भोजन की स्थिरता के अनुकूल बनाने में असमर्थ है, जो कि गलत है। आयुर्वेद के जीतने भी दावे है वो सब कॉमन सेंस और अंदाजे पर बनाए गए हैं। इसका मतलब ये नहीं कि सारे दावे गलत है, कहने का तात्पर्य यह है कि इन दावों पर आज की कोई मॉडर्न रिसर्च नहीं हुई है। क्योंकि आयुर्वेद कि ज्यादातर किताब उस समय में लिखी गई थी जब मॉडर्न साइंस इतनी विकसित नहीं हुई थी। इसीलिए आज अगर हम उनके दावों की जांच करते हैं तो उनके कई दावे गलत साबित भी होते हैं। इसी तरह यह भी दावा गलत है। चलिए इसे हम पाचन क्रिया की पूरी प्रक्रिया के साथ समझते हैं।

जैसे ही आप अपने मुंह में भोजन को चबाना शुरू करते हैं, आपकी पाचन प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जैसे ही आप भोजन चबाना स्टार्ट करते हैं आपका दिमाग लार ग्रंथियां (salivary glands) को लार (Saliva) उत्पन्न करने का संकेत देता है। जो आपकी भोजन को तोड़ने में सहायता करता है। और साथ ही में वह भोजन को नरम और चिकना बनाता है। ताकि भोजन अन्ननलिका और पेट में बड़ी आसानी से यात्रा कर सकें।

एक बार पेट में पहुंचने के बाद, पेट के एसिड (stomach acid) के साथ ट मिलाया जाता है, जो आगे भोजन को तोड़ देता है और लिक्विड स्वरूप में बनता है। जिसे चाइम (chyme) कहा जाता है। और फिर वो छोटी आंत के पहले भाग की ओर बढ़ता है।
छोटी आंत में, इस चाइम अग्न्याशय से डाइजेस्टिव एंजाइमा और लिवर से पित्त एसिड के साथ मिलाया जाता है। और फिर ये आगे चलकर चाइम को तोड़ते हैं। और प्रत्येक पोषक तत्व को रक्तप्रवाह में समामेलन के लिए तैयार किया जाता हैं।

कई लोग दावा करते हैं कि भोजन के साथ पानी पीने से स्टमक एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइमा पतला हो जाता है। जिससे शरीर के लिए भोजन को पचाना अधिक मुश्किल हो जाता है।

लेकिन कोई भी वैज्ञानिक रिसर्च इसका समर्थन नहीं करती है। पेट के खाली होने की गति का विश्लेषण करने वाले एक अध्ययन में देखा गया है कि तरल पदार्थ पाचन तंत्र से होकर ठोस पदार्थों की तुलना में अधिक तेजी से गुजरते हैं, लेकिन ठोस पदार्थों की पाचन गति पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

तो आशा करते हैं कि आज के इस आर्टिकल में आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा। और अगर आपको हमारा जवाब पसंद आया हो तो आपकी दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें। और हमें Instagram और telegram पर जरूर फॉलो करें वहां पर भी हम ऐसे ही मजेदार पोस्ट डालते रहते हैं। 

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