ozone layer kaise banti hai || How is an ozone layer formed in hindi

ओजोन की सबसे पहले खोज सन 1913 में फ्रेंच भौतिक शास्त्री चार्ल्स फेबरी Charles Fabry और हेनरी बुशन Henri Bussion ने की थी। इन वैज्ञानिकों ने जब सूर्य से आने वाले प्रकाश का स्पेक्ट्रम देखा तो उन्होंने पाया कि उसमें कुछ काले रंग के क्षेत्र थे तथा सूरज से पृथ्वी पर आ रहे रेडिएशन में से 310 nm से कम वेवलेंग्थ का कोई भी रेडिएशन सूर्य से पृथ्वी पर नहीं आ रहा था। स्पेक्ट्रम का यह हिस्सा अल्ट्रावॉयलेट हिस्सा कहलाता है, वैज्ञानिकों ने इससे यह निष्कर्ष निकाला कि कोई ना कोई तत्व आवश्य इन अल्ट्रावायलेट किरणों को सोख रहा है। जिससे कि स्पेक्ट्रम में काला क्षेत्र बन रहा है। आज हम सब जानते हैं कि पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन नाम की एक गैस है जो पृथ्वी पर अल्ट्रावायलेट किरणों आने से रोकती है। पर गाइस आपने कभी सोचा है कि ये ओजोन स्तर अखिल बना कैसे। तो देखा जाए तो इसकी साइकल बारिश वाली साइकिल की तरह है यह बनता भी खुद है और बिखरता भी खुद है। 

ओजोन लेयर का निर्माण कैसे होता है?How does the ozone layer formatted in Hindi?


मतलब की ओजोन परत का निर्माण सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों की वजह से ही होता है। जब यह अल्ट्रावायलेट किरणें सामान्य ऑक्सीजन मतलब की O2 के मॉलिक्यूल पर गिरती हैं, तो यह ओक्सीजन के दोनों एटम को अलग अलग कर देता है। 

O2 ऑक्सीजन का रासायनिक नाम है। ये O2 ऑक्सीजन के दो अलग अलग एटम से मिलकर बनता है। जब यह दो ऑक्सीजन के एटम मिलते हैं तब जाकर ये सामान्य ऑक्सीजन का निर्माण करते है। जिसे हम O2 मॉलिक्यूल मतलब कि ऑक्सीजन कहते है। जिसका हमारे वातावरण में 21% हिस्सा है।

तो जब ये अल्ट्रावायलेट किरण वातावरण में ऊपर मौजूद ऑक्सीजन से टकराती है तो ये ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल। ऑक्सीजन के एटम में बदल जाते हैं, और फिर ये मुक्त हुए ऑक्सीजन के एटम, ऑक्सीजन के दूसरे बचें मॉलिक्यूल से मिलकर O3 मतलब की ओजोन का निर्माण करते हैं। 

ओजोन का यह अणु अस्थाई होता है। यह अल्ट्रावॉयलेट किरणों को सोख कर पुनःऑक्सीजन के मॉलिक्यूल और एक ऑक्सीजन के एटम में बदल जाता है। और फिर से ये मुक्त ऑक्सीजन के एटम किसी अन्य ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल के साथ मिलकर ओजोन का दूसरा अणु बना लेता है। 

इस तरह ओजोन परत में ओजोन चक्र चलता रहता है। पर क्या आप जानते हो इस ओजोन गैस का हम सांस लेने में इस्तेमाल नहीं कर सकते नहीं तो हमारी इस गैस से मौत भी हो सकती है।

लेकिन फिर भी किस गैस का पृथ्वी पर रह रहे हर एक इंसान जानवर और यहां तक कि हर एक पेड़ पौधे के लिए बहुत ही जरूरी है। क्योंकि अगर यह गैस ना होता तो सूर्य से आ रहे यह अल्ट्रावायलेट किरणें जीवो में कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियां पैदा कर सकती हैं।

तो अब हमारा दूसरा क्वेश्चन, आखिर क्यों ओजोन स्तर में होल हो रहा है? Why is there a hole in the ozone layer in Hindi?


तो कई तरह के रसायन ओजोन परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इनमें मुख्य है क्लोरोफ्लोरोकार्बन। यह रसायन गैस रूप में स्ट्रेटोस्फीयर मतलब कि जहां पर ओजोन लेयर बनता है वहां तक तक पहुंच जागते हैं।

ओजोन परत पर पहुंचते ही अल्ट्रावायलेट किरणों की वजह से इनमें रहा क्लोरीन एटम अलग होकर, फ्री ऑक्सीजन एटम से जुड़ जाता हैं और जिससे ओजोन ऑक्सीजन साइकिल टूट जाता है। जब इस पर अल्ट्रावायलेट किरण पड़ता है तब यह वापस टूट जाता है और दूसरे किसी फ्री ऑक्सीजन एटम को पकड़ लेता है। और फिर धीरे-धीरे ये केमिकल भी स्ट्रेटोस्फीयर से बाहर निकल जाता। वो साइकिल वापस जुड़ जाती है। लेकिन जब तक है तब तक तो इस साइकिल को रोक सकता है ना। और क्या आप जानते हो कि ये क्लोरोफ्लोरोकार्बन हमारे फ्रिज एसी और पेइन्ट के कैन में यूज किया जाता था। जबकि अब बहुत सारे देशों में इन साधनों में इस गैसेस का यूज करना बैंड हो गया है।
और एक गलतफेमी ये भी है कि ओजोन स्तर में हुए होल की वजह से गर्मी बढ़ती है और जो ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण बनती है। ये सही नहीं है, वाहनों में से निकलने वाले गैसेस भी ट्रॉपस्फ़िअर यानी कि पृथ्वी के सबसे नीचे वाले वातावरण में ओजोन बनाती है। जोकि एक ग्रीनहाउस गैस की तरह काम करती है। और फोटो केमिकल स्मोक बनाती है जो समय-समय पर विश्व के कई शहरों को प्रदूषित करती हैं। उदाहरण के लिए यूएसए का लॉस एंजलिस चीन का बीजिंग और भारत में दिल्ली।

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