How did life begin on Earth in hindi? पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई?

How did life begin on Earth

क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी एक आग से धक-धक ते गोले मैं से इतनी खूबसूरत कैसे बन पायी। कैसे पृथ्वी पर इतना सारा पानी आया, और कैसे पृथ्वी पर जीवन पनपने लगा। ये सब ऐसे सवाल है ना दोस्तों जिसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। सत्यता नहीं। क्योंकि इन प्रश्नों का सही जवाब आज तक नाही कोई दे पाया है और ना ही कोई दे पाएगा। दोस्तों विज्ञान के पास ऐसी कई सारी थ्योरीस है। जो बताती है कि कैसे पृथ्वी एक आग से धड़कते गोले में से इतनी खूबसूरत बन पाई। और कैसे इस पर जीवन पनपने लगा। लेकिन अंत में ये भी एक थ्योरी ही है ना। इनसे एक अंदाजा मिलता है पक्का जवाब नहीं। लेकिन फिर भी ऐसी थ्योरी है, जिसका ज्यादातर वैज्ञानिक समर्थन करते हैं। आज हम ऐसी ही थ्योरी पर से आपको बताएंगे कि कैसे पृथ्वी का विकास हुआ और कैसे पृथ्वी पर जीवन पनपने लगा।

विषय– सूची।

तो दोस्तों बिगबैंग वाले आर्टिकल में हमने आपको बताया था कि। कैसे पृथ्वी का ढांचा तैयार हुआ और कैसे उसकी सतह पर लावा में से एक ठोस सतह तैयार हुई। अगर आपने वह आर्टिकल नहीं पढा तो यहां पर क्लिक करके आर्टिकल जरूर पढ़ें। Click here... आज के आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे पृथ्वी का वातावरण तैयार हुआ। और कैसे पृथ्वी पर जीवन पनपने लगा।

how to earth born
तो पृथ्वी के कोर के करण मैग्नेटिक फील्ड बढ़ने लगा ज्यादा जानकारी के लिए हमारा Earth magnetic field वाला आर्टिकल पढ़ें। और मंगल ग्रह के आकार का कोई ग्रहण की टक्कर से हमारे चांद का भी निर्माण हो चुका है और इसकी वजह से हमारी धरती की घूमने की स्पीड भी कम हो चुकी है। अब एक दिन 24 घंटे के होने लगा है। लेकिन अभी भी धरती पर एक बूंद पानी ही है।

  • ब्रह्मांड में पानी कहां से आया? Where did water in the universe come from in hindi?

तो धरती पर पानी के आने से पहले हम ये जान लेते हैं कि, इस ब्रह्मांड में पानी कहां से आया। आप सब जानते ही होंगे की पानी तीन एटम्स से मिलकर बनता है। दो हाइड्रोजन के एटम और एक ऑक्सीजन का एटम। इसीलिए इसका नाम H2O रखा गया है।

ब्रह्मांड के अस्तित्व में आने से पहले यहां पर कुछ नहीं था। माना जाता है कि आज से करीब 13.8 अरब साल पहले। एक धमाका हुआ जिसका नाम बिग बैंग रखा गया। और जिस से सृष्टि ने जन्म लिया। जन्म के 3 मिनट बाद जन्मा सबसे पहला एटम हाइड्रोजन‌। भारी तापमान में हाइड्रोजन के फ्यूज़नसे हीलियम बना। और फिर हाइड्रोजन्स और हीलियम के फ्यूज़न से बाकी के एलिमेंट्स बने। उनमें से एक था ऑक्सीजन। और फिर माहौल ठंडा होने लगा और दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन के एटम के मिलने से एक मॉलीक्यूल बना जिसका नाम पड़ा H2O. ये तो हुई ब्रह्माण्ड में H2O के आने की कहानी। लेकिन अब ये H2O पृथ्वी पर कैसे आया?

  • पृथ्वी में पानी कहां से आया? Where did water in the earth come from in hindi?

तो देखा जाए तो इस सवाल का कोई चौकस जवाब नहीं है। क्योंकि पृथ्वी पर पानी पहुंचने के रास्तों में वैज्ञानिकों के बीच भी मतभेद है। लेकिन फिर भी दो ऐसी थ्योरी है तू ज्यादा विश्वसनीय है।

Where did water in the earth come from?

तो पहली थ्योरी :-

13.8 अरब साल पहले बिग बैंग हुआ था। लेकिन पृथ्वी और सूरज 4.6 अरब साल बाद बने थे। जब पृथ्वी बन रही थी, तबी पानी के मॉलीक्यूल्स उन चट्टानों पर जमा हो गए, जिनसे पृथ्वी बन रही थी। लेकिन उस वक्त पृथ्वी बहुत गर्म थी। जिससे सतह का पानी सूख गया। जो भी पानी बचा वो पृथ्वी के अंदर बचा। बाद में ये पानी अंदर की गर्मी के कारण भाप बनकर बाहर की साइड आने लगा। तब तक पृथ्वी का वायुमंडल तैयार हो चुका था। इसलिए वह पानी भाप बनकर बादलों में बदल गया और फिर।

घनघोर घटा छाने लगी, बिजली चम चम चमकी।
कुछ टिमटिम बुडा बादी, फिर आई गणगौर गरजती बारिश।


इसी तरह बारिश हुई और सारे समंदर और नदियों का निर्माण हुआ। ये हुई पहली थ्योरी अब दूसरी थ्योरी की बात करते हैं।

दूसरी थ्योरी:-

तो दूसरी थ्योरी के अनुसार धरती पर पानी मौजूद नहीं था बल्कि बाहर से आया था। क्योंकि गर्मी केवल सूरज के पास वाले प्लैनेट्स में थी। सूरज से दूर वाले एस्टेरॉइड्स और कॉमेट्स ठंडे थे। और जहां पर पानी जमा होकर बचा रहा। बाद में धीरे-धीरे ये एस्टेरॉइड्स और कॉमेट्स धरती के पास पहुंचाएं और धरती से टकराए। और साथ में पानी भी लेकर आए। साइंस के नजरिए में दूसरी थ्योरी ज़्यादा स्वीकारीय मानी जाती है। लेकिन फिर भी ज़्यादातर साइंटिस्ट्स ये मानते हैं कि दोनों तरीके से पानी धरती पर आया, पर ज़्यादा तर पानी बाहर से ही आया है। अब धरती पर पानी आ चुका है अब बात करते हैं जीवन के पनपने की।

  • पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई? life on earth in hindi?


जीवन की उत्पत्ति का सबसे ताजा सिद्धांत अमेरिका की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशला से है। 1977 में प्रशांत महासागर में कार्यरत एक प्रयोगशाला ने पाया कि बहुत गहरे समुद्र के तल में दरारो में से निकलने वाले पानी का तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस होता है। इन दरारों को ऊष्णजलीय दरारें (हाइड्रोथर्मल वेन्ट्स) कहते हैं। पृथ्वी का स्तर कई प्लेटों से मिल कर बना है। ये प्लेटें खिसकती और एक-दूसरे से टकराती रहती हैं। जब दो प्लेटें टकराती हैं तब पृथ्वी की सतह हिलती है यानी भूकंप होता है। किंतु समुद्र की गहराइयों में दो प्लेटों के बीच स्थित ऊष्णजलीय दरारों में से रिस कर समुद्र का पानी अंदर जाता है। यहां उसका सामना पृथ्वी की गहराइयों में स्थित मैग्मा से होता है। इनके मिलने से पानी का तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। किंतु वह उस गहराई में स्थित होने के कारण भाप नहीं बन पाता। जब यह बहुत अधिक गरम और क्षारीय पानी बाहर आ कर गहरे समुद्र में स्थित बहुत अधिक ठंडे पानी से मिलता है। तब कई तरह के खनिज पदार्थों का निर्माण होता है। और एक के ऊपर एक जमा हो कर मीनार के समान रचना बनाते हैं। समुद्र के पेंदे में इस प्रकार की सैकड़ों फीट ऊंची मीनारें बनी हुई हैं। सन 2000 में अटलांटिक महासागर के पेंदे पर ऐसी मीनारों का एक पूरे शहर के समान जमावड़ा पाया गया। जब इन मीनारों का और अधिक विस्तार से अध्ययन किया गया तब प्रोफेसर रसल को उनके सिद्धांत का आधार मिल गया।

होता यह है कि खनिज पदार्थों की मीनारों में स्पंज के समान छिद्र होते हैं। इन छिद्रों में हो रही रासायनिक क्रियाओं के कारण ऊर्जा बनने लगती है। इस ऊर्जा के कारण कई प्रकार की रासायनिक क्रियाएं होने लगीं और इनसे पहला जीवित पदार्थ बना। इस जीवित पदार्थ के लिए ऊर्जा का स्रोत छिद्रों में ही उपलब्ध होने के कारण उनमें वृद्धि होने लगी। आज भी समुद्र के पेंदे पर स्थित गरम पानी की इन मीनारों में इस तरह के जीव पाए जाते हैं, जो पृथ्वी की सतह पर और कहीं नहीं मिलते।

ये जीवित पदार्थ लंबे काल तक समुद्र का सुख भोगते रहे। और करीब 250 करोड़ साल पहले कुछ बैक्टीरियों ने महसूस किया कि सूर्य से आ रही ऊर्जा का इस्तेमाल जीने के लिए कैसे किया जाए। महसूस करने का अर्थ यह कि यदि आपको एक बंद कमरे में रख दिया जाए तो आपका ध्यान सबसे पहले उस ओर जाएगा जिस ओर से हवा और प्रकाश आ रहे हैं। इसी तरह उन्होंने महसूस किया कि ऊर्जा का इस्तेमाल कैसे किया जाए। उनके इस प्रयास से पैदा हुआ दुनिया की सबसे कीमती चीज ऑक्सीजन। और इस तरह ऑक्सीजन ने हमारी दुनिया में एक नई क्रांति की शुरुआत कर दी। आप सब जानते ही होंगे कि शुरुआती महासागरों में लोहा भरा हुआ था। इस ऑक्सीजन के कारण समुंद्र में रहे लोहे में जंग लगने लगी। जंग लगा लोहा महासागरों के तल पर जमा होने लगा। करोड़ों वर्ष बाद यह जंग लगा लोहे का विशाल ढेर बाहर आया। यही ठोस चट्टानों का रूप लेने लगा। और फिर उस समय बीतने के बाद जब महासागरों में जंग लगाने के लिए लोहा नहीं बचा। तो ये बैक्टीरिया एक दूसरे काम में लग गए। उन्होंने इतनी मात्रा में ऑक्सीजन बनाया की महासागरों के साथ साथ हमारा पूरा वायुमंडल भी ऑक्सीजन से भर गया। और फिर नहीं हो सीजन ऊपर जाकर ओजोन का निर्माण करने लगा। और फिर जीवन ने एक लंबी छलांग लगाई। पहली बार किसी बैक्टीरिया ने ऑक्सीजन के सहारे भी जीना सीख लिया था। ऑक्सीजन ने अब पूरी कहानी बदल दी थी।

वैज्ञानिकों के अनुसार जब ऑ‍क्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है तो उसके दबाव के कारण आकार भी बढ़ने लगता है। इसके चलते समुद्र में एवं सबसे उन्नत समूह पैदा हुए। करीब 50 करोड़ साल पहले समुद्र में पहली कांटे वाली मछली पैदा हुई। ये मछलियां हमारी पूर्वज हैं। असल में आज के सारे रीढ़ वाले जीव इन मछलियों के आधारभूत ढांचे पर ही बने हैं।

ऑक्सीजन के कारण पौधे पानी से निकलकर सबसे आगे बढ़े। और पूरी धरती पर पेड़ होने लगे। करीब 40 करोड़ साल पहले जीव भी आगे बढ़ने को तैयार हो गए। धरती पर फैलने के क्रम में सबसे पहले महासागरों से बाहर आए एम्फीबियंस। जो कईयों के पूर्वजों के साथ हमारे भी एक पूर्वज हैं।

इसके बाद वह एम्फीबियंस कैसे एक इंसान का रूप लेने लगी जानने के लिए यहां पर क्लिक करें। Click here... (आगे क्या आर्टिकल पर काम चल रहा है लिख जाने के बाद ब्लीच कर दिया जाएगा)

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