हवा कैसे चलती है, और क्यों?

हवा कैसे और क्यों चलती है?

दोस्तों अक्सर हम गर्मियों में हवा के झोंके महसूस करते हैं। कड़कड़ाती धूप में एक हवा का झोंका आ जाए तो मजा आ जाता है। पर आपने कभी सोचा है कि आखिर ये हवा आती कैसे है। अर्थात hava kese lagta hai. (How does the wind blow) चलिए आज इसी बारे में बात करते हैं।

संक्षिप्त में बताऊं तो हवा उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से कम दबाव वाले क्षेत्रों में जाती हैं। और दबावों के बीच का अंतर जितना बड़ा होगा, हवा उतनी ही तेज से कम दबाव की ओर बढ़ेगी। और किसको हम हवा के झोंके के रूप में महसूस करते हैं।

चलिए इसे विस्तार से समझते हैं।


हवा एक मौसम का ही हिस्सा है। जिसे हम हर समय महसूस करते हैं, लेकिन वास्तव में यह हवा आती कहां से हैं? और हवा इतनी शक्तिशाल कैसे बन जाती है किससे पेड़ों को भी गिरा सकें। हवा लगने का कारण थोड़ा आश्चर्यजनक है। क्योंकि हवा लगने का कारण तापमान है। Let's explain...



हवा कैसे चलती है?


तो यह तो आप जानते होगी कि सूर्य की गर्मी से हवा गर्म हो जाती है। और जब हवा गर्म हो जाती है तब उसके परमाणु फेलने लगते हैं। और उसका घनत्व भी कम हो जाता है। गर्म हवा ठंडी हवा के मुकाबले हल्की होती है इसलिए वह ऊपर की तरफ उठने लगती है। जैसे कि उबलते पानी के एक बर्तन से भाप हमेशा ऊपर की ओर जाती है। ठीक इसी तरह हवा भी गर्म होकर ऊपर की ओर से लगती है। इस स्थिति में गर्म स्थानों वाले जग हो पर वायु का दबाव कम हो जाता है। जिसे हम एक तरह का 'खालीपन' कह सकते हैं। जिसे भरने के लिए अधिक दबाव वाले यानी की ठंडे स्थानों से हवा आने लगती है। भले ही कई बार ऐसी हवाओं आपको ठंडापन हमें महसूस नहीं करवाएं। लेकिन असल में यह हवा अपेक्षाकृत ठंडी और भारी ही होती है। गर्म वातावरण में आने के बाद वह हवा भी गर्म होकर कुछ समय बाद ऊपर उठने लगती है। और तापमान में हो रहे इसी बदलाव के कारण हवा का आना जाना लगा रहता है। जिसे हम हवा का चलना या बहना कहते हैं।



धरती गोल है जिसके कारण सूरज की किरणें सभी जगह पर एक समान नहीं बढ़ती। सूरज के सामने रहने वाले भागों पर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है, लेकिन अन्य भागों पर यह किरणें तिरछी पड़ती है। ऐसे में जिस जगह पर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है, वहां पर तापमान गर्म हो जाता है। और जहां पर सूरज की किरणें तिरछी पड़ती है वहां का तापमान ठंडा रहता है। इसी कारण यहां अक्सर देखा जाता है कि रात में हवा कम लगती है। ऐसे ही समुंदर के पास वाले इलाकों में हवा ज्यादा लगने का कारण यह है कि पानी जमीन की तुलना में देर से ठंडा या गर्म होता है। समुद्र के पास वाली जगहों में दिन के समय सूरज की गर्मी से जमीन गर्म हो जाती है। जिससे हवा हल्की होकर ऊपर उठने लगती है। और उसकी जगह लेने के लिए समुंदर के पानी के संपर्क में रहकर ठंडी रहने वाली हवा जमीन की तरफ आने लगती है।



और रात में यह स्थिति बिल्कुल उलट हो जाती है। रात्रि के समय में जमीन समुंदर के मुकाबले ज्यादा ठंडी हो जाती है। इसके कारण हवा जमीन से समंदर की ओर जाने लगती है।

तापमान के अलावा भौगोलिक स्थिति, पहाड़, धरती के अपने अक्ष पर घूमने आदि से भी हवा की चाल प्रभावित करते है।

लेकिन हवा आखिर चलती क्यों है?

आप सोच रहे होंगे कि हवा गर्म स्थान से ठंडे स्थान पर क्यों जाती है। यह तो प्रकृति का नियम है चीजें हमेशा फैलाव करती है।
यहां तक ​​कि इंसान भी करते हैं! जब लोग बस में चढ़ते हैं, तो क्या वे सभी बस में एक ही तरफ बैठते हैं? क्या अजनबी एक दूसरे के बगल में बैठते हैं जब और भी सीटें खाली हो? बिल्कुल नहीं। लोग भी ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहते हैं।

अगली बार जब आप हवा का झटका महसूस करते हैं, तो यह जरूर सोचना कि यह कहां से आ रहे होंगे। बाकी पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना।

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