पृथ्वी चुंबकीय क्षेत्र के बारे में संपूर्ण माहिती | earth magnetic field in hindi



दोस्तों पृथ्वी चुंबकीय क्षेत्र (Earth magnetic field) अभी बहुत चर्चा का कारण बना हुआ है। क्यों की आप को पता ही होगा अफ्रीका से लैटिन अमेरिका पास वाले इलाकों में पृथ्वी चुंबकीय क्षेत्र में बड़ी कमी आने लगी है। जिसे दक्षिण अटलांटिक विसंगति (South Atlantic Anomaly) नाम दिया गया है। आज हम इसी चीज पर बात करेगे।



विषय– सूची।



• पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कैसे बना। (How the Earth magnetic field was created in hindi)

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र, जिसे हम Earth's magnetic field के नाम से जानते हैं। दरअसल यह पृथ्वी के बाहरी कोर (earth outer core) में पिघले हुए लोहे और निकल के मिश्रण की संवहन धाराओं की गति के कारण पैदा होता है। संवहन धारा अर्थात (convection currents) किसी भी तरल पदार्थ जेसेली गेस, द्रव पदार्थ या प्लाज्मा जैसे पदार्थों में अणुओं के समग्र स्थानान्तरण द्वारा ऊष्मा का लेन-देन होना। सरल भाषा में समझें तो पृथ्वी के अन्दर मौजूद मैग्मा के अणुओं के आपसी टकर से एक विद्युत प्रवाह उत्पन्न होती है। और उस विद्युत प्रवाह और धरती के घूमने से चुंबकीय क्षेत्र बनता हैं।



ये ठीक उसी तरह काम करता है जैसे कि एक साइकिल पर डायनेमो लाइट। जब साइकिल को चलाया जाता है, तब डायनेमो में मौजूद चुम्बक घूमने लगते हैं। जिसकी वजह है विद्युत प्रवाह उत्पन होता है। जिस से बल्ब जलाया जाता है। जब अगर बल्ब की जगह विद्युत प्रवाह को एक जगह पर रोटेट किया जाय तो वो एक विद्युत चुंबक बनाए जाएगा।

पृथ्वी के संदर्भ में यह चीज ऐसे ही काम करती है। पृथ्वी के बाहरी कौर में मौजूद तरल धातु का प्रवाह विद्युत धाराओं को उत्पन्न करता है। और पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमने से विद्युत धाराओं एक चुंबकीय क्षेत्र बना लेता है। जिसे हम पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Earth magnetic field in Hindi) कहते हैं।


पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हमारे लिए इतना उपयोगी क्यों है। (Why is the Earth magnetic field so useful to us in Hindi)

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सूर्य से आ रहे सोलार विंड (solar wind) को विक्षेपित कर के ओजोन परत को बचाता है। अन्यथा सूर्य से आ रहे चार्ज पार्टिकल ओजोन परत को नस्ट कर सकते है। जो पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी विकिरण (ultraviolet radiation) से बचाती है। और तो और चुंबकीय क्षेत्र ना होने से हमारा पूरा वायुमंडल मंगल की तरह नष्ट हो जाएगा।



नेवीगेशन जैसे कि कंपास, जीपीएस, गूगल मैप जैसी सुविधा में भी हम पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड की वजह से चला पाते हैं। यहां तक कि विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया से लेकर कबूतरों तक, कई अन्य जीवों भी नेविगेशन के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं।

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर क्यों हो रहा है।(Why the Earth's magnetic field is getting weaker in hindi)


वैज्ञानिको का कहना है की पिछले 200 सालों से हमारी धरती अपनी चुंबकीय शक्ति घुमा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार अभी तक इसमें करीब 9 फीसदी की कमी आई है।  ज्यादातर कमी अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका तक के चुंबकीय क्षेत्र में देखी जा रही है. वैज्ञानिक इसे South Atlantic Anomaly कहते हैं।

ये होने का असल रीजन अभी तक वैज्ञानिकों को पता नहीं चला है। लेकिन इसके पीछे कई कारणों का अनुमान लगाया जा रहा है। जिनमें से सबसे ज्यादा अनुमान है वो ये है कि हो सकता है कि पृथ्वी के ध्रुव के पलटने का समय नजदीक आ रहा है। ध्रुव उत्क्रमण (Pole reversal)तब होता है जब उत्तर और दक्षिण चुंबकीय ध्रुव हट जाते हैं। हालांकि यह  होने में सदियों का समय लगता है। इस दैरान ग्रह के चारों ओर कई उत्तर और दक्षिण चुंबकीय ध्रुव होंगे। और ऐसा पहली बार नहीं है कि पृथ्वी पर पोल रिवर्सल होने वाला हो। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी है। पिछले 83 मिलियन वर्षों में 183 उलटफेर हुए हैं। और पिछली बार ये उलट ब्रूनेश-मटुआमा उलट (Brunhes-Matuyama reversal) 780,000 साल पहले हुई थी। इस उलट के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए मैं आपको एक Wikipedia की लिंक दे रहा हूं वहां पर जाकर पढ़ सकते हो। Click here...

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