big bang theory in hindi | prithvi ka nirman kaise hua.

Big bang

हमारा ब्रह्माण्ड इतना बड़ा और रहस्यों से भरपूर है की, जिसकी कल्पना करना भी हम इंसानों की सोच से परे है । इस अनंत ब्रह्माण्ड में हमारी पृथ्वी एक कण से भी छोटी नज़र आती है। विराट ब्रह्माण्ड की गहराइयो में कहीं अपार रौशनी है तो, कहीं बेहद घोर अंधकार। कहीं करोडो डिग्री सेल्सियस तक गर्मी है , तो कहीं कड़ाके की ठण्ड। कहीं पर हमारे सूर्य से भी करोडो गुना ज्यादा घनात्व वाले तारे हैं , तो कहीं पर बर्फ से भी ठंडो ग्रहों का बसेरा है। कुछ जगहों पर जीवन का अस्तित्व है तो, कहीं जगहों पर समय का भी अस्तित्व नहीं है। इतना विशाल और अकाल्पनिक ब्रह्मांड आखिर किसने रचा? यह सवाल आज भी उतना ही ताजा है जितना की प्राचीन काल में हुआ करता था।

ऋग्वेद मैं लिखा है, इस जगत् की उत्पत्ति से पहले ना ही किसी का अस्तित्व था, और ना ही अनस्तित्व, ना ही मृत्यु थी और ना ही अमरता, था तो सिर्फ अंधकार में लिपटा अंधकार और वो जल की भांति अनादि पदार्थ था, जिसका कोई रूप नहीं था, छिपा था कहां क्या, किसने देखा था, उस पल तो अगम अटल जल भी नहीं था।

धर्म तो सीधे सीधे ईश्वर को रचयीता मानकर छुटकारा पा लेता है, जैसे कि तनख, बाइबल और ‍कुरान के अनुसार इसे 6 दिन में ईश्वर ने रचा और सातवें दिन उसने आराम किया। बस! लेकिन इस संबंध में वेद और विज्ञान की धारणाएं भिन्न है। वेद कहते हैं कि ईश्‍वर ने ब्रह्मांड नहीं रचा। ईश्‍वर के होने से ब्रह्मांड रचाता गया। उनकी उपस्थिति ही इतनी जबरदस्त थी कि सब कुछ होता गया। आत्मा उन ईश्‍वर का ही प्रतिबिम्ब है। शिव पुराण मैं लिखा है कि नाद और बिंदु के मिलन से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। नाद अर्थात ध्वनि और बिंदु अर्थात प्रकाश। इसे अनाहत या अनहद की ध्वनि कहते हैं जो आज भी सतत जारी है इसी ध्वनि को हिंदुओं ने ॐ के रूप में व्यक्त किया है। 

और विज्ञान मानता है कि ईश्वर ने यह ब्रह्मांड नहीं रचा है, बल्कि वास्तव में यह भौतिक विज्ञान के अपरिहार्य नियमों का नतीजा है। स्टीफन हॉकिंग ने अपनी नवीनतम किताब ‘the great design’ में कहा कि ब्रह्मांड कुछ नहीं से खुद को सृजित कर सकता है और करेगा। स्वतःप्रवर्तित के चलते ही कुछ नहीं के बजाय कुछ है, ब्रह्मांड का वजूद है, तो हमारा वजूद है। सन् 1927 में महान खगोल शास्त्री Georges Lemaitre ने Friedmann lemaitre Robertson walker नाम का समीकरण बनाया जो अलबर्ट आइन्स्टीन की Theory of general relativity पर आधारित था । इनके अनुसार ब्रम्हांड की उत्पत्ति एक प्राथमिक परमाणु से हुई है। एक महाविस्फोट के साथ ब्रह्माण्ड का विस्तार हुआ और ब्रह्माण्ड के पदार्थ एक दुसरे से दूर जाने लगे। और इस थ्योरी का नाम दिया गया बिग बैंग थ्योरी। सन 1965 में cosmic background radiation की खोज ने Lemaitre की Big bang theory को सबसे ज्यादा मान्य सिधांत का दर्जा दिलवाया । आज Lemaitre की Big bang theory ब्रम्हाण्ड की उत्पत्ति के लिए सबसे ज्यादा मान्यता सिद्ध थ्योरी है साइंस के नजर में।

बिग बैंग थ्योरी की बात की जाए तो हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि ब्रह्माण्ड दो तरह के हैं एक है दृश्य ब्रह्माण्ड और दूसरा है अदृश्य ब्रह्माण्ड। दृश्य ब्रह्माण्ड वो जिसे हम देख सकते हैं। जैसे की ग्रह , तारे , उल्का , गलेक्सी , निहारिकायें , प्रकाश , गति , समय , गुरुत्वाकर्षण आदि। अदृश्य ब्रह्माण्ड दृश्य ब्रह्माण्ड के बाहर के विस्तार अज्ञात जगहों को कहा जाता है। मतलब कि ब्रह्मांड में कई ऐसी जगहों है जहां पर हमें कुछ दिखता नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ होने का एहसास होता है। वह अंधकार में जगह जहां पर कुछ नहीं है उसे अदृश्य ब्रह्मांड कहते हैं। हमारे दृश्य ब्रह्माण्ड की सीमाओ के बार अज्ञात अदृश्य ब्रह्माण्ड में क्या है यह तो किसी को नहीं मालूम लेकिन। दृश्य ब्रह्माण्ड पर हमारे बैज्ञानिक काफी हद तक शोध कर चुके हैं । 

तो चलिए चलते है 13.5 अरब वर्ष पीछे। ये है वो बिंदु जिस से निकल कर आज का पूरा ब्रह्मांड बना है।
Big Bang Singularity

जिस कि साइज एक परमाणु से भी छोटी है। इस में समाया हुए हैं ब्रह्मांड के सभी अणु, परमाणु, सारा दृश्य और अदृश्य ब्रह्माण्ड जो आज हम देख रहे हैं वो सब इस एक छोटे से बिंदु में समाया समाया हुआ है। ये वो स्थिति है जहाँ पर Physics के कोई भी नियम काम नहीं करते। इस अवस्था में अंतरिक्ष और टाइम का भी कोई अस्तित्व नहीं है। इसपरिस्थिति में किसी अज्ञात कारण से अचानक एक विस्फोट होता है। और जिस से हमारे ब्रह्माण्ड का जन्म होने लगा।
रुको रुको ये तारे और ग्रह वाला ब्रह्माण्ड नहीं है। बल्कि परमाणु वाला ब्रह्माण्ड है। तकरीबन 3,80,000 साल तक ब्रह्माण्ड युही बढ़ता रहा। और इस के बाद जन्म लेती है एक काया पल्ट ने वाली चीज ग्रेविटी। क्यों की इस के बिना कभी ब्रह्माण्ड कभी बन ही नहीं सकता। ग्रेविटी का जन्म हुआ क्यों की विस्फोट के बाद परमाणु बराबरी से नहीं फैले थे। इस लिए ज्यादा परमाणु वाले छोटे जुंड में ग्रेविटी अपना कमाल दिखाने लगी। और अपनी ताकत से 30,00,000 सालो तक गैस और धूल के बादलों को दबा ती रही। जिस से गरमी और दबाव बहोत तेजिसे बढ़ने लगा है। और इस तापमान कि वजह से हाइड्रोजन के परमाणु आपस में टकराने लगे है। और इस टकराव की वजह से उत्पन होने लगा नया तत्व हिल्यम। जिस से निकाल ने लगी ऊर्जा, और अच्छा नक से तरो का जन्म होने लगा। और अब ब्रह्माण्ड उस Dark time को छोड़ कर रोशनी की ओर बढ़ने लगा। अब हमारा पूरा ब्रह्मांड रोशन हो चुका है। 

लेकिन इस ब्रह्मांड में किसी चीज की कमी है। तारे तो करोड़ों है लेकिन करो तो एक भी नहीं है। अब ब्रह्मांड को अब हमारे लिए एक घर भी तो बनाना है। लेकिन प्रॉब्लम ये है कि इस वक़्त ब्रह्माण्ड के पास सिर्फ हाइड्रोजन और हीलियम गैस ही है। उसे हमें जीने के लिए ऑक्सीजन, कार्बन, नाइट्रोजन और आयरन जैसे अनेक तत्व भी तो बनाने है। इसीलिए तारों में बहुत बड़ी प्रक्रिया होनी शुरू हो गई। हाइड्रोजन को हिलियम से और हीलियम को लिथियम से मिलाकर 25 अलग-अलग तत्व को बनाना शुरु कर दिए जो जीने के लिए जरूरी है। लेकिन अभी भी कुछ तत्वों की कमी है, जैसे कि सोना, तांबा, यूरेनियम, जिंक और अनेक तत्व भी तो बनने बाकी है। और इसे बनाने के लिए तारों के पास इतनी उर्जा नहीं है। इसलिए तारों में एक-दूसरे प्रक्रिया शुरू होने लगी। और अचानक से कुछ तारे विस्फोट हो गए।

Supernova

 इस विस्फोट को सुपरनोवा कहते हैं। और इसी ने हमारे आने वाले वर्तमान को जन्म दिया। सुपरनोवा की वजह से आज हम हैं हमारे खून में आयन है। अब ब्रह्मांड में वो सब तत्व आ चुके हैं जिसे कोई जीव जन्म ले पाए। इसीलिए सारे तत्व को एक जगह पर जमा करना पड़ेगा। जिसमें हमारी मदद की ग्रेविटी ने। बिग बैंग के बाद पूरे ब्रह्मांड में धूल कण और गैस के ठंडे बादल फैल गए हैं। जिसे हम Nebula कहते हैं। हम दूसरे ग्रहों की बात नहीं करते और सिटी फास्ट फॉरवार्ड करके हमारे ग्रह पृथ्वी पर चलते हैं।

अब देखते ही देखते मैं 4.6 अरब साल बीत गए। एक धूलकण और ठंडे गैस का बना बादल। अपनी मिल्की वे गैलेक्सी के अंदर घूम रहा था। और अब इनके बीच ग्रेविटी अपना जादू दिखाना शुरू कर चुकी है। यह आसमान में घूम रहे धूलकण और गैस के बादल ग्रेविटी के कारण आपस में जुड़ ने लगे हैं। और जुड़ कर इसी Nebula के बीच में सूर्य का निर्माण करने लगे हैं। बिल्कुल उसी तरह जैसे किसी तारे की उत्पत्ति होती है।

Nebula
Nebula के बीच सूर्य के निर्माण के बाद बचे हुए धूलकण और चट्टाने ने सूर्य के चारों ओर घूमते हुए एक डिस्क का निर्माण कर लिया है। इस डिस्क में घूमती हुए छोटी-छोटी चट्टाने ग्रेविटी के कारण आपस में जुड़कर बड़ी-बड़ी चट्टानें का निर्माण करने लगी है। और इसी तरह हमारी पृथ्वी का ढांचा तैयार हो चुका है।

तो पृथ्वी का ढांचा तैयार हो गया है। लेकिन अभी भी उल्का पिंडों की बारिश होनी रुकि नहीं है। और हमारी धरती पूरी जाने लावा की बनी हुई है। निरंतर उल्कापिंडों के टकराव के बाद एक समय ऐसा आया, जब धरती से एस्ट्रॉयड का टकराव कम हो जाता है। और अब धीरे-धीरे समय बीतते बीतते पृथ्वी ठंडी होनी शुरू हो गई है। लेकिन अभी भी कोई जिव जन्म ले पाए ऐसी परिस्थिति नहीं है। उस वक्त धरती के दिन रात 6 घंटे के होते थे। मतलब 1 दिन 12 घंटे का होता था। और पूरी धरती पर ज्वालामुखी ही ज्वालामुखी है। अब और थोड़ा समय बीत ने लगता है। ग्रेविटी के कारण हल्की चीजें ऊपर की ओर बढ़ने लगी और भारी चीजें नीचे की ओर। हल्की चीजों ने धरती के ऊपरी सतह पर पपड़ी बना दिया जिसके कारण धरती का बाहरी इलाका लावा की जगह ठोस बन चुका है। और भारी चीजें ग्रेविटी के कारण अंदर की ओर जाने लगी जिसने पिघले हुए लोहे और निकल एक कोर बना दिया। और इसी पिघले हुए धातु के घूमने के कारण मैग्नेटिक फील्ड का निर्माण होने लगा। जो जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है। मैग्नेटिक फील्ड के ऊपर हमारा आर्टिकल पढ़ें click here...  लेकिन अभी भी हमारे पास हमारा चांद नहीं है।

450 करोड़ साल पहले मंगल ग्रहों के आकार का एक ग्रह धरती के पास आने लगता है। इतना पास किया वह धरती से टकरा जाय। और अचानक से वो धरती से टकरा जाता है। इस टकराव के कारण धरती का एक बड़ा सा हिस्सा निकलकर आसमान में छोटे-छोटे टुकड़ों में बट कर फैल गया। फिलहाल हमारी धरती के पास शनि ग्रह के जैसे वलयों का निर्माण हो चुका है। और इसी टकराव से धरती अपने अक्ष पर 23.4 डिग्री तक झुक गयी। जिससे पृथ्वी पर मौसम में बदलाव आना शुरू हो गए।

फिर ग्रेविटी के कारण ये चट्टाने भी आपस में जुड़ कर एक गोल चांद का निर्माण करने लगी। यह चांद धरती के आज के मुकाबले काफी ज्यादा नजदीक था। इसकी ग्रेविटी का प्रभाव धरती पर आज के मुकाबले कुछ ज्यादा पढ़ता था। जिससे तेज रफ्तार घूम रही पृथ्वी अपनी रफ्तार को धीमी करने लगी। और समय बीते बीते हमारा चांद धरती से दूर होने लगा। जो आज भी हो रहा है।

लेकिन अभी भी धरती पर कोई इंसान या कोई जीव जन्म ले पाए ऐसा वातावरण नहीं है। पृथ्वी के पास अपना ओजोन लेयर भी नहीं है और ऑक्सीजन भी नहीं है।

Earth without water
 
अब आखिर ऐसा क्या होता है जिससे धरती का ओझोन लेयर बनने लगता है। और धरती पर पानी और ऑक्सीजन भी जमा होने लगते हैं। जिससे कोई जीव धरती पर जन्म ले पाए। ऐसा वातावरण कैसे बनने लगता है इसकी बात हमारे दूसरे आर्टिकल में है। उसे पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें click here...

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